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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 27

पलटू साहिब की बानी भाग—१ २१
( ५२ )
भया तगादा साहु का गया बहाना भूल ॥
गया बहाना भूल नफा में मूर गँवाया ।
भया साहु से झूठ बैठि के पूँजी खाया ॥
नहीं लिहा हरि नाम करी नहिं संतन सेवा ।
तीनों पन गये बीत पूजते देवी देवा ॥
सारी सरहज सास धाइ के लूटि मजा री ।
तुम्हरे सीस बिसान कोऊ ना संग तुम्हारी ॥
पलटू मानै काल ना कठिन चलावै सूल ।
भया तगादा साहु का गया बहाना भूल ॥
( ५३ )
काल महासिल¹ साहु का सिर पर पहुँचा आय ॥
सिर पर पहुँचा आय उजुर कछु एकौ नाहीं ।
पहुँचा धै अगुआय² लिहे धरि मारत जाही ॥
मार परे भा चेत लगा तब करन बिचारा ।
मूरख के परसंग बैठि कै बात बिगारा ॥
चलै न एकौ जोर बहाना का को लेवै ।
नहीं ब्याज नहि मूर साहु को का लै देवै ॥
पलटू वादा³ टरि गया पूँजी गई वराय⁴ ।
काल महासिल साहु का सिर पर पहुँचा आय ॥
( ५४ )
ज्यों ज्यो सूखै ताल है त्यों त्यों मीन मलीन ॥
त्यों त्यों मीन मलीन जेठ में सूख्यो पानी ।
तीनों पन गये बीति भजन का मरम न जानी ॥
कँवल गये कुम्हिलाय हंस ने किया पयाना ।
(१) तहसील करने वाला सिपाही । (२) पहुँचा पकड़ कर आगे कर लिया
जिस में भाग न सकें । (३) इकरार । (४) चुक गई ।