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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 24

१८ कुंडलिया
( ४४ )
गरमै गरमै हेलुवा गंफा लीजै मारि ॥
गंफा लीजै मारि मनुष तन जात सिराना ।
भजि लीजै भगवान काल सिर पर नियरना ॥
मीठा है हरि नाम जियन का नाहिं भरोसा ।
खाय लेहु भरि पेट आगे से जात परोसा ॥
लीजै लाहा लूटि दिना दुइ संतन पासा ।
अज हूँ चेत गँवार जात है खाली स्वासा ॥
पलटू अटक न कीजिये कूच है साँझ सकारि ।
गरमै गरमै हेलुवा गंफा लीजै मारि ॥
( ४५ )
सुर नर मुनि जोगी जती सबै काल बसि होय ॥
सबै काल बसि होय मौत कालौ की होती ।
पारब्रह्म भगवान मरै ना अबिगत जोती ॥
जा को काल डेराय ओट ताही की लीजै ॥
काल की कहा बसाय भक्ति जो गुरु की कीजै ॥
जरामरन मिटि जाय सहज में औना जाना ।
जपि कै नाम अनाम संत जन तत्व समाना ॥
बेद धनंतर मरि गया पलटू अमर न कोय ।
सुर नर मुनि जोगी जती सबै काल बसि होय ॥
( ४६ )
चोला भया पुराना आज फटै की काल ॥
आज फटै की काल तेहू पै है ललचाना ।
तीनों पन गे बीत भजन का मरम ना जाना ॥
नख सिख भये सफेद तेहू पै नाहीं चेतै ।
जोरि जोरि धन धरै गला औरन का रेतै ॥
अब का करिहौ यार काल ने किहा तगादा ।