पाकदर्पण (राजा नल प्रणीत - इन्द्रदेव त्रिपाठी माधुरी हिन्दी व्याख्या सहित)
Pakadarpana of Raja Nala with Madhuri Hindi Commentary
राजा नल (टीकाकार: पं. इन्द्रदेव त्रिपाठी) द्वारा
पृष्ठ 44, कुल 69 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ पाकदर्पणम्
अथवा तण्डुलीयोत्थैः खण्डैर्वा तद्विमोचनम् ।
अनेनैव प्रकारेण गते तिक्ते भवेन्नमम् ॥ ४४७ ॥
सम्भारादीन् पुनस्तत्र पूर्ववत् परियोजयेत् ।
बद्ध्वा तत्पूगपट्टेने वेष्टयित्वा प्रदापयेत् ॥ ४४८ ॥
क्रिमिहृद्दीपनं पथ्यं गुल्मशूलानिलापहम् ॥ ४४९ ॥
कुवेराक्षी (करञ्ज) पत्र का पाक बनाने की विधि तथा गुण— नवीन
तथा सुन्दर तरुण कुबेराक्षी का पत्र लेकर कुण्डली (गुडूची) चूर्ण के साथ
उबाल कर उसकी तिक्तता (तिताई) को दूर करे। अथवा चौराई के चूर्ण के
साथ या खाँड़ के साथ तिक्तता को दूर करे। इस प्रकार पाक करने से तिक्तता
नष्ट हो जाती है और वह मधुर हो जाता है। इसके बाद सम्भार (मसाल-
नमक) आदि छोड़कर पुनः पूर्ववत् पाक करे और पूगपट्ट नेत्र से बाँधकर तथा
आवेष्टित कर खाने के लिये दे। यह क्रिमि रोग को दूर करने वाला, जा