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पाकदर्पण (राजा नल प्रणीत - इन्द्रदेव त्रिपाठी माधुरी हिन्दी व्याख्या सहित)

पाकदर्पण (राजा नल प्रणीत - इन्द्रदेव त्रिपाठी माधुरी हिन्दी व्याख्या सहित)

Pakadarpana of Raja Nala with Madhuri Hindi Commentary

राजा नल (टीकाकार: पं. इन्द्रदेव त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished69 पृष्ठ

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दूर करनेवाला है तथा भूख को बढ़ाने वाला, हृदय के लिये हितकर, स्वादिष्ट एवं
आत्मा को अच्छी तरह प्रसन्न करनेवाला है ॥ १६५-१६७ ॥
असित कुलित्थररसनिर्माणविधिर्गुणाश्च
सितेतरकुलित्थस्य रसमादायसूदराट् ।
क्षिपेन्मरिचलशुनरामठानलसैन्धवान् ॥ १६८ ॥
दापयेद्वासितं द्रव्यैरधिवास्य सुगन्धिभिः ।
मरुद्दोषहरं सम्यक् श्लेष्मजिद्वातशोषणम् ॥ १६९ ॥
कृष्णकुरथीरस बनाने की विधि तथा गुण— उत्तम पाचक कृष्णकुरथी
का रस लेकर उसमें मरिच, लहसुन, हींग, चित्रक तथा सेन्धा नमक को (उचित
मात्रा में) छोड़ दे और सुगन्धित द्रव्यों से अधिवासित कर सुगन्धित बना ले
और पान करने के लिये दे । यह अच्छी तरह वात-विकार को दूर करता है,
कफ विकार को जीत लेता है तथा वात रोग का शोषण करता है ॥१६८-१६९॥
खलस्य (निर्मित खलद्रव्यस्य) प्रशस्तिः