सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 93

यहाँ प्रस्तुत पृष्ठ का पंक्ति-दर-पंक्ति लिप्यंतरण (Transcription) दिया गया है:

६२ पद्मावत।
उन महँ जो एक गुरू कहावा। जस गुड़ दे काहू बौरावा ॥
कुँवर बतीसो लक्षण राता। दर्शये लषन कहे एक बाता ॥
जानो आहि गोपचन्दै योगी। की सुप्राय भरथरी वियोगी ॥
वे पिङ्गलै गये कजरी आरनं। ये सिंहल सोवहिं केहिकारन ॥
दो० यह मूरत यह मुद्रा, हम न देख अवधूत ।
जानहुँ होहिं न योगी, कोइ राजा के पूत ॥
सुनि सुबात रानी रथ चढ़ी। कहँ अस योगी जो देखों मढ़ी ॥
लै सँगसखी कीन्ह तहँफेरा। योगिआयजनु अपछरँनहिं घेरा॥
नयन कचूरे प्रेम मधु भरे। भइ सुदृष्टि योगी सो ढुरे ॥
योगीदृष्टि दृष्टिसों लीन्हा। नयनें रूप नयनहिं जिवदीन्हा॥
जो मधु छकतपरा तेहिपाले। सुध न रही वह एक पियाले ॥
पड़ा मंत गोरख कर चेला। जिवतन छांड़िस्वैरगे कहँ खेला ॥
किंगरी गही जो हुत बैरागी। मरती बार वही धुन लागी ॥
दो० जेहि धन्ध जाकर मन बसे, सपने सूझसुगन्ध ।
तेहिकारणे तपसी तपसाधहिं, करहिंप्रेमचितबन्ध॥
पद्मावत जस सुना बखानूं। सहसँ किरा देखे तस भानू ॥
मेलिसँ चन्दन मगँख नजागा। अधिको सोतसीर तनलागा॥
तब चन्दन आखेरें हियें लिखी। भीख लई तुम योग न सिखी ॥
बौर आय तबगा तुइँ सोई। कैसे भुक्ति परापत होई ॥
० बत्तीस हुनर जाननेवाला १ अंदाज से बात करता है २ नाम योगी
३-४-१४ नाम रानी ५ जंगल ६ इन्द्रलोक की परियां ७ आंख पियाले की
तरह ८ शराब ९-१३ निगाह १०-११ आंख १२ आसमान १५ जाना १६
. बाजा १७ पकड़ना १८ वास्ते १६ तारीफ़ २० हज़ार २१ सूर्य २२
. क २३ शायद २४ बहुत २५ ठंडा २६ हर्फ़ २७ दिल २८ भीख
२६ दरवाज़ा ३० रोज़ी ३१ ॥