पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 92, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत गई देव दुआरा । भीतर मँडफ कीन पैसारा ॥
देवै संशय भा जिय केरा । भागों केहिदिशि मण्डफ घेरा ॥
एक जुहारे कीन्ह औ दूजा । तिसरे आय बढ़ायसि पूजा ॥
फर फूलन सब मँडफ भरावा । चन्दन अगर देव अन्हवावा ॥
भरि सेंदुर आगें भइ खरी । परसि देव पुनि पांयन परी ॥
और सहेली सबे बिवाहीँ । मोकहँ देवकि तुहुँवरें नाहीं ॥
हौँ निरगुन जेँ कीन्ह न सेवा । गुनें निरगुनें दाताँ तुम देवा ॥
दो० वरसंयोगों मोहिं मिलवहु, कलशं जातहौँ मान ।
जा दिन इच्छा पूजै, बेग चढ़ातुं आन ॥
इच्छे इच्छ बिनती जस जानी । पुनि करे जोरिठाढ़ भइ रानी ॥
उतरें को देय देव सोगयो । शब्दे कोट मण्डफ महँ भयो ॥
काटिप्यारों जैसे परेवा । सोगयो ईश उतरें को देवा ॥
भये जीव बिन नाउत ओझा । विषभइ पूरि कालभयें गोझा ॥
जो देखे जनु विषहेरें डसा । देख चरित पद्मावत हँसा ॥
भल हम आय मनावा देवा । गाजन सोय को मानै सेवा ॥
को इच्छा पुरवै दुख खोवा । जहिंमन आय सो तनतन सोवा ॥
दो० चहुँदिशि सखी उठावहिं, शीशें बिकल नहिं डोल ।
धर कोइ जीवन जानो, मखरे बकत कुबोल ।
ततखने आय सखी तहँसानी । कौतुक एक न देखहु रानी ॥
पूर्व दौरै मठ योगी छाये । नाजनो कौन देश ते आये ॥
जनु उन योग तन्त अब खेला । सिद्धे होय निसरे सब चेला ॥
१ सलाम १ जाविन्द २ बेहुनर ३-५ हुनर ४ देनेवाला ६ खाविन्द लायक
७ आरजू ८-१० जल्द ६ हाथ ११ जवाब १२-१६ आवाज १३ छोड़ देना १४
देवता १५ सांप १७ ख़िदमत १८ चारों तरफ १६ शिर २० यकायक २१ दर-
वाज़ा २२ कामिल २३ ॥