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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 63

६२ पद्मावत ।
मरीचहहिं पै मरै न पावहिं । उठै आग सबलोग बुझावहिं ॥
घड़ी एक सुट भयो अँडूरो । पुनि पाछे बीता होय रुरो ॥
दो० टूटि मने नवं मोती, फूट मने दसें कांच ।
लीन्ह समेट सबै आभरनं, होयगा दुखकर नांच ॥
निकसा राजा सुनके पूरे । छांड़ि नगर मेला होय दुरे ॥
राये रांग सब भये बियोगी । सोरह सहसं कुँवर भये योगी ॥
माया मोह हरी सैंहाथा । देखि न बूझ नियानं न साथा ॥
छांड़हिं लोग कुटुम्ब सबकोऊ । भयेनिराश दुखसुखतर्जदोऊ ॥
सँवरहिं राजा सोइ अकेलौं । जेहिरे पन्थे खेलेहोय चेला ॥
नगरनगर औ गांवहिं गांवां । छांड़ चला सब ठांवहिं ठांवां ॥
काकर गढ़ काकर मठ माया । ताकर सब जाकर जिवकायां ॥
दो० चलाकटकै योगिनके, करके गेरुवा भेस ।
कोसबीस चारैहुँ दिश, जानहुँ फूला टेसूँ ॥
आगे सगुन सगुनैं यहितका । दहीमांझ रूपे कर टका ॥
भरे कलश तरुनी चलिआई । दही लिये ग्वालन गुहराई ॥
मालिन आय मौर ले गाथे । खंजनं बैठ नागके माथे ॥
दाहिन मिरगेँ आयगाधायें । प्रतीहारैं बोला घर बायें ॥
बिरखैं सवारिया दाहिनबोला । बायें दिशैं गीदरैं नहिं डोला ॥
बायें अकोशी धूरे आये । लोवाँ दरश आय देखराये ॥
बायें कुरेरी दाहिन कोचौं । पहुँची भुक्ति जैस मनरोचौ ॥
शोर १-२ ज़ेवर ३-शेर ४ राजा के भाई ५ दुःखी ६ हज़ार ७ आख़िर ८
छोड़ना ६ परमेश्वर १० राह ११ जगह १२ बदन १३ फ़ौज १४ चारों तरफ़
१५ टेसू १६ नजूमी १७ रुपया दही में रखके १८ जवान औरत १६ ममोला
२० हिरन २१ तीतर २२ सांड़ २३ तरफ़ २४ सियार २५ चील्ह २६ लोँवड़ी
२७ कौवा २८ उल्लू २६ रोज़ी ३० चाहना ३१ ॥