पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ६१
तुम अस बिछुड़े पीव पिरीता । जहँवां राम तहां सँगसीता ॥
जबलहिजिवसँग छांड़िनकायाँ । करिहौं सेव प्रखारहूँ पाया ॥
भली पद्मिनी रूप अनूपौँ । हमसे कोइ न आगोरि रूपा ॥
भौहें भली पुरुपनेँ की दीठी⁶ । जहँ जाना तहँ दीन्ह न पीठौ ॥
दो० दीन्ह अशीश सबै मिलि, तुम माथे नितँछात ।
राजकरो चित्तौरगढ़, राखो पिय अहिवात ॥
तुम तिरियाँ मतिहीन तुम्हारी । मूरुख सोइ मता घर नारी ॥
राघव जो सीता सँग लाई । रावणहरी कौन सिधि⁸ पाई ॥
यह संसार स्वप्न जस हेराँ । अन्तै न आपनको कहिकेरा ॥
राजाभरथरिहिं नहिंसुनी अयौनी । जेहिके घर सोरहसै रानी ॥
कुँचै लीन्हे तरवा सहराई । भा योगी कोउ संग न लाई ॥
योगी काहि भोग से काजू । चही न मेहरी चहै न राजू ॥
जूड़ि करकटौ पै भीखहिचाहा । योगी ताँतै भात सों काहा ॥
दो० कहा न मानी राजा, तेंजी सवाँई भीर ।
चला छांड़िकै रोवत, फिरिके दीन्हन धीरे ॥
रोवत माता फिरै न बाँराँ । रतनचला जगँ भा अँधियारा ॥
बांरे मोर जियावैर रता । सो लैचला सुत्रों परवता ॥
रोवहिं रानी तँजेहिं पराना । फोरहिंवरी²³ करहिं खरिहाना ॥
चूरहिंगें अभरने उरेँ हारू । अव काकहँ हम करव शिंगारू ॥
जाकहँ कही रहसिके पीव । सोई चला काकर यह जीव ॥
बदन १ धोना २ बेमिसाल ३ खूबसूरत ४ मर्द ५ देखना ६-१० हमेशा
७ औरत ८ कामिल ९ आखिर ११ नादान १२ छातीकीडंडी १३ ठंडीरोटीका
टुकड़ा १४ गर्व १५ छोड़ना १६-२४ सब १७ धीरज १८ लड़का १६-२१
डुलियां २० ज़िन्दगी का सबब २२ तोता २३ चूड़ी २५ गरदन के ज़ेवर २६
छाती २७ ॥