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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 54

पद्मावत । ५३
आय दोहों नारंग बिच भये । देखि मयूर ठमक रहिगये ॥
आय जुरी भँवरन की पांती । चन्दन गाभ वास की माती ॥
गइ कालिन्दी बिरह सताई । चलपराग अरबैल बिचआई ॥
नाभी कुंड सो वानारसी । साँहें को होय मीचें तेहिलिखी ॥
दो० शिरकरवँततनकाशी लैले, बहुतसीफ तेहिआश ।
(१५४) बहुत धूम घूँट मैं देखी, उत्तर न देइ निराश ॥
चोंटी पीट लन्हि वै पाछें । जनु पहिर चली अप्सरा काँछें ॥
मलैयागिरि की पीठि सँवारे । बेनी नाग चढ़ा जनु कारे ॥
लहरैं देत पीठ जनु चढ़ा । चीर उढ़ावा केंचुल मढ़ा ॥
वेहिकाकहँ अस बेनी कीन्ही । चन्दनवास भुअंगहि लीन्ही ॥
कृष्णकरा चढ़ा वह माथे । तब सो लूटि अब छूटन नाथे ॥
कारे कमल गहे मुख देखा । शशि पीछे जनु राहुबिशेखा ॥
को देखै पावै वह नागु । सो देखै माथे मन भागू ॥
दो० पन्नग जो पंकज मुखगहे, खंजन तेहिशिर बैठ ।
(१५५) छत्र सिंहासन राजधन, ताकहँ होइ जो दीठ ॥
लंक खीन असआहिनकाहू । केहरि कहूँन वह सरताहू ॥
बसा लंक पखनीगजभीनी । तेहितेँ अधिक लंक वहखीनी ॥
परहँस पिवर भये तहँ बसौ । लिये डंख मानुष कहँ डसां ॥
मानहुँ नलिन खंड दुइ भये । दुहँबिच लंक तार रहिगये ॥
हिये सोमूड़परचलीवहनागा। पैगदेत कितसहसैकै लागा ॥
यमुना १ नाममुक़ाम २ बराबर ३ मौत ४ धुआं ५ जवाब ६ ना-
उम्मेद ७ इन्द्रपरी ८ धोती ६ चन्दन १० चोटी ११-१२ काला नाग १३-
१४ पकड़ना १५-१६ चांद १६ सांप १७ कमल १८ ममोला २० कमर २१-
२५-२८-३३ पतली २२ चीता २३ भंवरा २४-३१ बहुत पतली २६
बहुत २७ बारीक २६ डाह ३० कोकावेली ३२ छाती ३४ डर ३५ ॥