पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछुद्रघंट मोहहिं नरराजा । इन्द्र अखाड़ आये जनु बाजा ॥
नाम बीन गैहे कामिनी । लाकहिं सबै राग रागिनी ॥
दो० सिंहैं नजीता लंकैं शर, हार लीन्ह बनवास ।
तेहि रिस रक्तपिये मानुष, खाय मारके मांस ॥११५॥
नाभी कुण्डसो मलयसमीरू । समुद्र भँवर जस भवै गंभीरू ॥
बहुते भँवर बौंडर भये । पहुँच न सके स्वर्ग कहँ गये ॥
चन्दनमांझ कुरंगिन खोजू । वेहिंको पाव को राजा भोजू ॥
को वह लागहि वंचल सींझा । काकहिं लिखी ऐसको रीझा ॥
सोहै कमल सुगन्ध शरीरू । समुद्र लहर सोहै तन चीरू ॥
झूलहि रतन पाटके झोपां । साज मदन वहिकाकहँ कोपा ॥
अबहिं सो अहै कमलकी करी । नजनों कौन भँवर कहँ धरी ॥
दो० बेधरही जग बासना, निरमलै मेदै सुगन्ध ।११६।
तेहि अरघान भँवर सब लुब्धे, तजेंहिं न दियेबन्ध ॥
बैरणों तम्बै लंकै की शोभा । औ गर्जे गवनदेख सबलोभा॥
जुरे जंघ शोभा अति पाये । केला खंभ फेर जनु लाये ॥
कमल चरण अतिरौंत विशेखी । रहै पांट पर भूमि नदेखी ॥
देवता हाथ हाथ पगलेहीं । जहँ पगपरै शीशँ तहँ देहीं ॥
माथे भागन कोउ अस पावा । चरणकमल लै शीशँ चढ़ावा॥
चौरा चांद सूर्य उजियारा । पायल बीच करहिं झनकारा॥
अनवट बिछिया नखत तँराई । पहुँच सकै को पांइन ताई ॥
करधनी १ नामबाजा २ पकड़ेहुये ३ चीता ४ कमर ५ चन्दनकी हवा ६
गंहिरा ७ आसमान ८ हरिनके पांवका निशान ९ लहँगा १० कामदेव ११
पांकसांझ १२ केसर १३ छोड़ना १४ तारीफ़ करना १५ चूतड़ १६ कमर
१७ हाथी १८ बहुत लाल १६ तख़्त २० ज़मीन २१ क़दम २२ शिर २३-२४
छोटे नखत २५ ॥