पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 30, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २६
उनई घटा पराजग छाहां। शंशि की शरण लीन्ह जनु राहू॥
छिपगये दिनभानु कीदसा। तेहि निशि नखतचांद परगसा॥
भूल चकोर दृष्टि तेहि लावा। मेघघटा महँ चन्द दिखावा ॥
दशन दामिनी कोकिलभाखै। भौहैं धनुष गगन लैराखै ॥
नयन खंजन दुइ केल करेहीं। कुच नारंग मधुकैरै रसलेहीं ॥
दो० सरोवर रूप विमोहा, हिये हिलोर करै।
पाउँ छुवे मगैं पाउँ, तन मन लहरें दे ॥ (५१)
धरी तीर सब कंचुक सारी । सरवर महँ पैठीं सब वौरी ॥
पानी तीर जानि सब बेलैं। हुलसैंहिं करहिंकामकी केलैं॥
करलैं केश विषहरैं विषभरे। लहरें लेहिं कमल मुख धरे ॥
नवल वसन्त संवारे कैरी। होय प्रकट जानहु रस भरी ॥
उठी कोप जस दाँड़िम दाखौं। भई अनन्त प्रेमकी साखा ॥
सरवर नहिं समाय संसारा। चांद नहाय बैठिलिये तारा ॥
धनसों नीर शेशि तैंरई उई। अबकित दृष्टि कमलऔकोई॥
दो० चकई बिछुर पुकारी, कहां मिलहो नांह। (५२)
एकचन्दनिशि स्वर्ग महँ, दिनदूसरजलमांह ॥
लागीं केलकरैं मँझ नीराँ। हंस लजाय बैठिहै तीराँ ॥
पद्मावतिकौतुक कहँराखे। तुमहिंशशि होहितराये नहिंराखे ॥
बाद मेल के खेल पसारा। हार देव जो खेलत हारा ॥
दुनिया १ चांद २-३१-४१ सूर्य ३ रात्रि ४ खिलना ५ निगाह ६-३३ दाँत ७
बिजुली ८ कोकिला कीसी बोली ६ कमान १० आसमान ११-३६ आँख १२
छाती १३-१८ भँवर १४ तालाब १५-१६-२६ दिल १६ शायद १७ लड़की
२० खुशहोना २१ मुलायम २२ बाल २३ सांप २४ कली २५ ज़ाहिर २६ अनार
२७ अंगूर २८ पानी ३०-३८ नखत ३२ क़ोकाबेली ३४ राति ३५ बीच ३७
किनाग ३६ तमाशा ४० नखत ४२ ॥