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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 29

२८ पद्मावत ।
৹खण्डतीसरा स्नानखण्ड पद्मावत ॥
एक दिवसे कवन्यो तहँआय । मानसरोवरें २ चली अन्हाइ ॥
पद्मावति सब सखी बोलाई । जनुफुलवार सबे चलिआई ॥
कोइचम्पाँ कोइगोँदै सहेली । कोइ सुकेतै करुणाँ रसवेली ॥
कोइँ सुगुलाल सुदरशनँ राती । कोइबकाउं कोइबकचनें भांती ॥
कोइ सो बोलसेरै पुहपावैती । कोइ जाही जूँही सेवैती ॥
कोइ सुवर्ने जर्द ज्यों केसरँ । कोइ शिंगारहोरै नागेसेरँ ॥
कोई कूजाँ सतबैरग चँबेली । कोई २२ कदम सुरसरैस बेली ॥
दो० चलीं सबै मालेंती संगहि, फूले कमल कुमोद ।
बेध रही गुण गन्धरब, वास बरमला मोद ॥
खेलत मानसरोवरें गई । जाय पालें २७ पर ठाढ़ी भई ॥
देखि सरोवरें हँसली केली । पद्मावति सोँ कहहिं सहेली ॥
ए रानी मन देखु बिचारी । यहि नैहर रहना दिन चारी ॥
जबलग अहे पिताकेरँ राजू । खेलिलेहु जो खेलहि आजू ॥
पुनि सासुर हम गवनबैं काले । कितहमकितयहसरवैरैँ पाँले ॥
कितआवन पुनिआपन हाथा । कित मिलके आवब एक साथा ॥
सासुननँद बोलहि जियलेहीं । दारुणैँ ससुर न निसरे देहीं ॥
दो० पीउ पियार सब ऊपर, सो पुनि करै वह काहि ।
तेहि सुख राखहिकी दुख, वह कस जन्म निबाहि ॥
सरवैरैं तीर पद्मिनी आई । खोपौँ छोड़ि केश बिखराई ॥
शेशि मुखअँगैँ मलीगैरै रानी । तामहँ झाप लीन्ह अरधानी ॥
दिन १ नाम तालाब २-१६ नामफूल ३-४-५-६-७-८-६-१०-११-१२-१३३-
१४-१५-१६-१८-१६-२०-२१-२२-२३-२४ ज़ाफ़रान १७ कौकाबेली २५
किनारा २७-३२ तालाब २८-३१-३४ बाप २६ जाना ३० मुश्किल ३३
चोटी ३५ चांद ३६ बदन ३७ चन्दन ३८ ॥