पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३० पद्मावत ।
सँवरहिं सांवर गोरहिं गोरी । आपन आपन लीन्हसजोरी ॥
बूझौ खेल खेलौ एक साथा । हारि न होय पराये हाथा ॥
आजहिं खेल बहुरि कित होय । खेलगई कित खेलै कोय ॥
धनि सो खेल खेल रस प्रेमा । रेंवतई और कुशलै क्षेमा ॥
दाँव. दो० मुहम्मदबारजो प्रेमकी, ज्योंभावे त्यों खेल । ६३।
तेलहिं फूलहिंवासज्यों, होय फुलायल तेल ॥
सखी एक तैं खेल न जाना । भई अचेतै मनहारगँवाना ॥
कमल डारगहि भई बिकरारौ । कासों पुकारों आपन हारा ॥
कित खेले आयौं एक साथा । हार गँवाय चल्यौं ले हाथा ॥
घर पैठत पूँछब यह हारू । कौन उतरै पावव पैसारू ॥
नयन सीप आंसू तस भरे । जानहु मोति गिरहिं सबढरे ॥
सखिन कहा बौरी कोकिला। कौनपानी जेहिपबुनूँ नहिं हिला ॥
हार गँवाय सो ऐसे रोवा । हरे हराये लेव जो खोवा ॥
दो० लागीं सबमिलि हेरी, बूड बूड एक साथ ।
कोई उठी मोतीले, काहू घोंघा हाथ ॥
कहा मानसेरं चहा सुपाई । पारस रूप यहां लगि आई ॥
भा निरमलै तेहिपायन परशे । पावा रूप रूप के दरशे ॥
मली समीर बासु तनआई । भा शीतल तनतपनबुझाई ॥
नाजानौंकौनपवँनै लेआवा । पुण्यदशा भइ पाप गँवावा ॥
ततछन हार बेगि उतराना । पावा सखहिं चन्द विहसाना ॥
बिक्सौ कमलदेखिशशि रेखा। भइतेहि रूप जहां जो देखा ॥
ठकुराई १ खैरियत २ बेहोश ३ बेकरार ४ जवाव ५ आँख ६ हवा ७-१४
ढूंढना ८-६ नाम तालाब १० पाक ११ चन्दन १२ ठंडा १३ जल्द १४
फूलना १६ चांद १७ ॥