पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २७१
पहिले रतनैं हाथ कै, चहौं पदारथ लीन्ह ॥
माया मोह विबश भा राजा । शाह खेल शतरंज करसाजा ॥
राजाहै जबलग शिर घामू । हमतुमघड़िकै करहिंबिश्रामू ॥
दर्पन शाह भीतै तहँ लावा । देखों जोह झरोखें आवा ॥
खेलहिं दोऊ शाह औ राजा । शाहक रुख दर्पनरहि साजा ॥
प्रेमक लुब्ध पियादे पाउँ । चलै सौंहिं ताके कहँठाउँ ॥
घोड़ा दै फरजी बँद लावा । जेहिं मुहरा रुखचहै सोपावा ॥
राजा पील देइ शह मांगा । शहँ दै चाहि मैरथ स्वांगा ॥
दो० पीलहि पील देखावा, भयो दुहूँ चौदांत ।
राजा चहै बुर्द भा, शाह चहै शहमात ॥
सूरै देख वै तेरैं दासी । जहँ शशि तहां जाय परकौसी ॥
सुना जो हम देहली सुलतान् । देखों आज तपै जस भानू ॥
ऊंच छत्र ताकर जगमाहां । जग जोहांह सब वहकीछाहां ॥
बैठि सिंहासन गर्वहि गूंजा । एक छत्र चारहुँ खंड धूंजा ॥
निरखि न जायसौंहि वहपाहीं। सबैनवै कै दृष्टि तराहीं ॥
मन माथे वह रूप न दूजा । सबरूपवन्त करहिं वह पूजा ॥
हमअस कसा कसौटी आरसें । तुहूँ देख कस कंचनें पारस ॥
दो० वादशाह देहली कर, कित चितौर महँ आव ।
देख लेहु पद्मावत, जें न रहैं पछताव ॥
विकसै जो कुमुदै कह शशि ठाऊं। विकसा कमल सुनत रबि नाऊं
तथा राजा १ तथा पद्मावत २ एक घड़ी ३ आराम ४ दीवार ५ भरा-
हुआ ६ सामने ७-१८ जगह ८ शाह देके बाज़ी जीतना चाहा ६
मुक़ाबिल १० सूर्य ११-१५-२५ नखत १२ चांद तथा पद्मावत १३-२४ रो-
शनी १४ गरूर १६ देखना १७ निगाह १६ आईना २० सोना २१ खिलना २२
कोकाबेली २३ ॥