पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 266, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २६५
फरे खजीजाँ दाड़िमें दाखौँ। जो वहं पंथै जाय सो चांखा ॥
कनकैकै छत्र सिंहासन साजा। पैठत पँवरें मिला लै राजा ॥
चढ़ाशाह चढ़ चितौर देखा। सब संसार पाँयँतर लेखा ॥
दो० देखा शाह गगनैं गढ़, इन्द्रलोक के साज।
कहीराज फिरताकर, स्वर्ग करें जो राज ॥
चढ़ गढ़ ऊपर सङ्गत देखी। इन्द्रपुरी सो जान बिशेखी ॥
ताल तलावा सरवरें भरे। औअम्बरोंउँ चहुँदिशिफरे ॥
कुवां बावरी भांतिहि भांती। मढ़मएडप तहँतहँ बहुँपांती ॥
रॉयैं राग घरघर सुख चाऊ। कनकैमँदिरनगकीन्हजड़ाऊ॥
निशिनँ दिनबाजहिंमन्दिरतूरैं। रहसकूद सब लोग सेंदूरैं ॥
रतनैं पदारथ नग जो बखाने। घूरन महँ देखे अहिरानें ॥
मँदिर मँदिर फुलवारी बारी। बारबोरै तहँ चित्रैं सँवारी ॥
दो० पांसासोरैंकुँवरसबखेलांहिं, श्रवनैंहींगीतउनाहिं।
चैन चाउ तस देखा, जनु गढ़ छेका नाहिं ॥
देखत शाह कीन्ह तहँ फेरा। जहाँ मंदिर पद्मावत केरा ॥
आसपास सरवरं चहुँ पासा। मँदिरमाँझेजनुलागअकासा॥
कनकैकै सँवार नगहिंसबजरा। गगनैंचन्द जनु नखतहिंभरा॥
सरवरैं चहुँदिशि पुरइनफूली। देखा बौंरि रहा मन भूली ॥
कुँवरिलाख दुइवार अँगौरे। दुहुँदिशि पँवरैं ठाढ़ करैंज़ोरे ॥
शारदूलैं दुहुँ दिशि गढ़काढें। कलकँजँहि जानहुँ रिसठाढ़े ॥
जानवन्त लिये चित्रैं कटाऊ। वहँतकपँवैरै सोलागजड़ाऊ ॥
नाममेवा १ अनार २ अंगूर ३ राह ४ सोना ५-१२-२२ दरवाज़ा ६-
१६-२५-२७-३२ आसमान ७-८-२३ तालाब ९-२०-२४ बगीचा १०
अमीरउमरा ११ रात १३ नामवाज़ा १४ जवाहिरात १५ तसवीर १७-३१
चौसर १८ मकान १६ चीज २१ पेशवाई २६ हाथ२८लाल शेर २६ डकारना ३०॥