पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६४ पद्मावत ।
पानी दूध सो पानी घीव । पानि घटे घट रहै न जीव ॥
पानी माँझे समानी ज्योती । पानी उपजैन माणिक मोती ॥
पानीमहँ सब निरमलं कला । पानी जोछुवै होय निरमला ॥
सो पानी मन गर्व न करई । शीश नाय घालें पै धरई ॥
दो० मुहम्मद नीर गंभीर जो, सो तेहि मिलहि समन्द ।
भरै ते भारी होरहे, लूछहिं वाजहिं द्वन्द ॥
सीझ रसोई भयो विहानू । गढ़ देखे गवने सुलतानु ॥
कमल सुहाय शूर सँग लीन्हा । राघव चेतन आगे कीन्हा ॥
ततखन आय बेवान जो पहुँचा । मनसाँ अधिक गगन से ऊँचा ॥
उघरी पँवरैं चला सुलतान् । जानहु चला गगन कहँ भानू ॥
पँवरी सात सात खण्ड वांके । सातों खण्ड गाढ़े दुइनाके ॥
आज पँवर मुख भा निरमरा । जो सुलतान आय पँगधरा ॥
जानु उरेह काट सब काढ़े । चित्रैं मूरतें विनवहिं ठाढ़े ॥
दो० लख लख बैठ पँवरियों, जेहिते नवहिं करोर ।
जेहिं सब पँवर उघारे, ठाढ़ भये कर जोर ॥
खण्ड अड़तीसवां किला वर्णन वादशाह ॥
सातों पँवरी कनक कैं केवारा । सातहुँ पर वाजहिं घरियारा ॥
सातहिं रंग सो सातों पँवरी । तब तहँ चढ़े फिरै नव भँवरी ॥
खंड खंड साज पलँग औ पीढ़ी । जानहु इन्द्रलोककी सीढ़ी ॥
चन्दन वृक्ष सुहाई छाहां । अमृत कुण्ड भरा तेहि माहां ॥
बदन १ चीज २ पैदा होना ३ जवाहऱात ४ पाकसाफ़ ५-६ ग़रूर ७
शिर ८ पानी ६ डोल १० बहादुर ११ नामभाट १२ तुरंत १३ हवादार १४
बहुत १५ आसमान १६-१८ दरवाज़ा १७ सूर्य्य १६ क़दम २० तसवीर २१
दरवान २२ हाथ २३ सोना २४ पेड़ २५ ॥