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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 257

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२५६ पद्मावत ।
पाहने कर रंबि पाहन हीरा । वेधों ३ रतन पान दै बीरा ॥
सुरजों सेतें कहा यहि भेजै । पलट जाहु अब मानहु सेऊ ॥
कहु तोसों पद्मिन ना लेऊँ । जो राकंहि छांड़ गढ़ देऊँ ॥
दो० आपन देशखाहु निहचलें, और चंदेरी ८ लेहु ।
समुद्र समन्दर्तन कीन्ह तोहि, ते पांचोनग देहु ॥
सुरजा पलट सिहें चढ़गाजा । आज्ञौ जाय कही जहँ राजा ॥
अबहूँ हिये १२ समभरे राजा । वादशाह सो जूझन छाजा ॥
जाकर देहिरी पृथ्बी सेई । चहै तो मारे औ जिव लेई ॥
पिंजर महँ तू लीन्ह परेवों । गढैंपति सोत्राचै के सेव्यौ ॥
जवलग जीभ अहे मुखतोरे । सँवर उघेल विनय करजोरे ॥
पुनि जो जीभ पकड़ जिवलेई । को खोले को बोलै देई ॥
आगे जस हमीर मैसन्ती । जो तस करेसि तोर भायन्ती ॥
दो० देख काल्ह गढ़ टूटे, राज वही कर होय ।
कर सेवा शिरनाय के, घरन घाल बुधि खोय ॥
सुरजों जस हमीर मनताका । और निवाही आपनशाकों ॥
वह अस हौं शकवँन्दी नाहीं । हौं सो भोजँ विक्रमै उपराहीं ॥
बरस सात महँ अन्न न खांगौं । पानि पहारचुवै बिन मांगा ॥
तेहि ऊपर जो पै गढ़ टूटा । सत शंकवँन्दी केर न छूटा ॥
सोरह लाख कुँवर हैं मोरे । पतँग परहिं जस दीप अँजोरे २७ ॥
जेहि दिन चांचर वाहों जोरी । समँदो २८ फागमेल के होरी ॥
पत्थर १ सूर्य २ मारडालना ३ नाम पहलवान ४-६ भेद ५ मुलाक़ात ६
यक़ीन ७ नाम मुल्क ८ तोहफ़ा ६ शेर १० हुक्म ११ दिल १२ जानवर प-
रिन्द १३ क़िलादार १४ ख़िदमत १५ ताबेदारी १६ नामराजा १७-२०-
२३-२४ अहङ्कारी १८ बहादुरी २१ बहादुर २२-२६ कमी २५ रोशनी २७
फागखेलों २८ ॥