सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 255, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 255

२५४ पद्मावत ।
तहां तीर कहँ पहुँचहिं, दृष्टि जहां न पहुँच ॥
पातुरिन नाच दीन्ह जो पीठी। पड़गइसोंहैं शाहकी दीठी¹ ॥
देखत शाह सिंहासन गूँजा। कवल गमिर्गचन्द्र² तेहि मूँजा ॥
छांड़हि बान जाहिं उपराहीं। गर्व केर शिर सदा तराहीं ॥
बोलत बान लाख भा ऊंचा। कोई कोट कोई पौंवरैं सो पहुँचा ॥
जहांगीर कन्नौज का राजा। वहक बान पातुरिके लागा ॥
बाजाँ बान जांघ जस नाचा। जिवगा स्वर्ग पराभुइँ सांचा ॥
उड़सों नाच नचिनया मारा। रहँसे तुर्क बाज कै तारा ॥
दो० जो गढ़ साज़हि लाखदश, कोटि सँवारहिं कोट।
बादशाह जब चाहैं, बनै न एको ओट ॥
राजैं पौंवेरैं अकास चलाई। पैरों बाँध चहुँफेर ललाई ॥
सेतबन्धे जस राघव बाँधा। परा फेर भुइँ भार न कांधा ॥
हनुमत है सब लाग गुहारा। आवहिं चहुँदिशि चले पहारा ॥
श्वेत फटकैं जस लागे गढ़ा। बांध उठाय चहूँ गढ़ मढ़ा ॥
खंड खंड ऊपर होय पटाऊ। चित्रै अनेक अनेक कटाऊ ॥
सीढ़ी होत जाहिं बहु भांती। जहां चढ़े हस्तिर्न की पांती ॥
भाग रगर्ज कस कहत न आवा। जनहुँ उठाय गगन लै लावा ॥
दो० राहु लाग जस चांदहि, गढ़ लागा तस बांध।
सब धड़ लील ठाढ़भा, रहा जाय गढ़ कांध ॥
राजसभा सब मन्त्री बैठी। देखन जाय मुन्दभइ दीठी¹ ॥
उठा बांध तस सब गढ़ बांधा। कीजे बेगेँ² भार जस कांधा ॥
निगाह १-३-२१ सामने २ हिरन का बच्चा ४ गरूर ५ क़िला ६ दरवाज़ा ७
पहुँचा ८ आसमान ६-२० मौक़ूफ़ १० खुश ११ फ़ौज से बादशाह की तोपें
चलीं १२ राजा के क़िला में भूँचाल पड़ा १३ पुल १४ श्रीरामचन्द्रजी १५
सफ़ेद पत्थर १६ तसवीर १७ हाथी १८ मरहला १६ जल्द २२ ॥