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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 245

२४४ पद्मावत ।
सैंदुर आग शीश उपराहीं । पहियातरखन चमकत जाहीं ॥
कुच गोलादुइ हिरदै लाई । अञ्चलध्वजा रहहिं छिटकाई ॥
रसनों लूक रहहिं मुखखोलें । लङ्का जरै सो उनके बोलें ॥
अलकें जँजीरबहुतगयँ वांधे । खींचहिं हस्ती टूटहिं कांधे ॥
बीर शृंगार दोउ इकट्ठाऊँ । शत्रुशार्ल गढ़भंजन नाऊँ ॥
दो० तिलक पलीता माथे, दशनैं वज्रके बानै ।
जेहिहेरहिं तेहिमारहिं, चुरकुसकरैनिदानै ॥
जेहिं जेहिंपंथ चलीवेआवहिं । आवहिंजरतआगतसलावहिं॥
जरहिंजोपरबतलागअकासा । बनखंडधकहहिंपलाशैकोपासा॥
गैंड़ा गयँद जरे भे कारे । आवैं मृगी रोजै झनकारे ॥
कोयल नाग काग औ भौंरा । औरजुजरे तिनहिको सँवरा ॥
जरा समुद्र पानि भा खारा । यमुना श्यामभई तेहि झारा ॥
धूमें श्यामअंत्रक्ष भे मेघौ । गगनै श्यामभा धुवां जु भेघा॥
सूरूज जरा चांद औ राहू । धर्ती जरी लङ्क भा दाहू ॥
दो० धर्ती स्वर्ग असूझभा, तबहुँ न आग बुझाय ।
उठहिं बज्र जर डंगैवे, धूमें रही जगछाय ॥
आवै डोलत स्वर्ग पतारू । कांपे धर्ति न अँगवे भारू ॥
टूटहिं परपत मेरू पहारा । होयहोयधूरउड़हिं होयक्षारौँ ॥
सतखंड धर्ती भइ खंडखण्डा । ऊपर अष्ट भये ब्रह्माण्डौ ॥
इन्द्र आय तेहि खंडहोयछावा । चढ़सबकटकै घोर दौड़ावा ॥

शिर १ छाती २ सीना ३ ज़बान ४ बाल ५ गरदन ६ हाथी ७ जगह ८
दुश्मन को मारनेवाली ६ क़िला तोड़नेवाली १० दांत ११ तीर १२ देखना
१३ बहुत १४ ढांख १५ हाथी १६ नाम जानवर १७-१८ धुवां १६-२६
बीच २० बादल २१ आसमान २२-२४-२७-३१ जलना २३ ढेर २५
बोझ न उठाना २८ नाम पहाड़ २६ धूर ३० फ़ौज ३२ ॥