पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २४५
जेहिंपंथँ चल ऐरावतं हाथी । अबहिंसोडगरगर्गनँमहँआती ॥
औ जहँ जामरही वह धूरी । अबहूँ बसे सो हरिचंद पूरी ॥
गगन में छिपा खेहें तसब्राई । सूरज छिपा रयँनिहोय आई ॥
दो० गयोसिकंदरकजलिवन, भयो सो तस अँधियार ।
हाथ पसार न सूझे, बरै लाग मसयार ॥
दिनहिं रात अस परीअचाका । भारवि अस्तचन्द्ररथ हांका ॥
मंदिरनैं जगतैं दीपपरगसी । पंथकें चलत बसेरें बसी ॥
दिनके पंख जरत उड़ भागे । निशि केनिसचरेसकलागे ॥
कमल सुकेता कुमुदिनिफूले । चकई बिछुरा चकमन भूले ॥
चला कटक अस चढ़ा अपूरी । अगलहिंपानी पिछलहिंधूरी ॥
महिं उजड़ीसायरैंसवसूखा । वनखँडै रहे न एको रूखा ॥
गंदैं गिरि फूटभयेसव माटी । हस्तिं हेरान तहांको चांटी ॥
दो० खेहँ उड़ानी जाहिघर, हेरत फिरत सो खेह ।
पियआवाहिंअवंहैंटितोहिं, अंजननयनउरेह ॥
यहिविधिहोतपयाने सोआवा। आय शाह चितौर नियरावा ॥
राजा राउ देख सब चढ़ा । आव कटकें सब लोहे मढ़ा ॥
चहुँदिशिंदृष्टि परी गजजूहाँ । श्यामघंटा मेघा जस रूहा ॥
औरो उँरूकूछ सूझ न आना । स्वर्गलोकघुमरहहिंनिशाना ॥
चढ़ धौराहर देखहिं रँनी । धनतुईअस जाकर सुलतानी ॥
कै धन रतनसेन तुइँ राजा । जाकहँतुकंकटके यहिसाजा ॥
राह १ नाम हाथी २ आसमान ३ खाक ४ रात ५-११ सूर्य ६ मकान ७
दुनियां ८-रोशन ६ मुसाफिर १० कोकाबेली १२ फ़ौज १३-२४-३२ ज़-
मीन १४ तालाव १५ जंगल १६ क़िला १७ पहाड़ १८ हाथी १६ चींटी २०
धूर २१ निगाह २२-२५ कूच २३ हाथियोंका हलक़ा २६ काली घटा
छाई २७ वार पार २८ आसमान २६ महल ३० पद्मावत ३१ ॥