पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 244, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २४३
समुद्र न लेखैं लावै, गंग सहसै मुखनाह ।
बादशाह हठ कीन्ह पयानाँ । इन्द्र भंडार डोल भयमाना ॥
नब्बे लाख सवार जुचंदा । जो देखा सो लोहे मढ़ा ॥
बीस सहसै घुमरहहिं निशाना । गुर्ल कञ्चन फेरै असमाना ॥
बैरख ढाल गगनैं का छाई । चला कटक धर्ती न समाई ॥
सहस पांति गजमत्त चलावा । घुसतअकाशधसतभुइँआवा ॥
वृक्ष उचार पेड़ि सो लीन्ही । मस्तक भार तारमुखदीन्ही ॥
चढ़हिं पहाड़हिं भयगढ़लागू । बनखंडखोह न देखहिं आगू ॥
दो० कोउ काहू न सँभारे, होत आव दर चांप ।
धर्ति आप कहँ कांपै, स्वर्ग आपकहँ कांप॥
चलीं कमानें जेहिमुखगोला । आवहिं चलीधर्ति सबडोला॥
लागे चक्र बज्रके गढ़े । चमकहिं रथ सोने के मढ़े ॥
तेहिपर विषमें कमानें धरीं । सांचे अष्टधातु की भरीं ॥
सौसौ मनै पियहिं वै दारूँ । लागहिं जहां सो टूट पहारू॥
माती रहहिं रथहिं पर परीं । शत्रुनैं कहँ सौहैं उठ खरी ॥
जो लागै संसार न डोलहिं । होयभुइँकम्पजीभजो खोलहिं॥
सहसैं सहसहस्तिनंकी पाँती । खांचहिंरथडोलहिं नहिंमाँती ॥
दो० नदी नार सब पानी, जहां धरैं वै पाँव ।
ऊँच खाल बनबीहर, होत बराबर आव ॥
कहौं शृंगार जैसि वै नारी । दारू पियहिं जैसि मतवारी ॥
उठै आग जो छोड़हिंश्वासा । धुवां सो लोगै जाय अकासा॥
हज़ार १ कूच २ हज़ार ३ चोंटी ४ आसमान ५ फ़ौज ६ हाथीमस्त ७
जड़ ८ आसमान ६ तोपैं १० पहिया ११ भारी १२ तथा बारूद १३ दुश्मन
१४ सामने १५ हज़ार १६ हाथी १७ ॥