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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 223

२३२ पद्मावत ।
दो० यहू बात तहँ पहुँची, सदा छत्र सुख छाथ ।
ब्राह्मण एक हारहै ठाढ़ा, कँकन जड़ाऊ हाथ ॥
मयों शाह मन सुनत भिखारी । परदेशी कहँ पूँछ हँकारी ॥
हम पुनि जाना है परदेशा । कौनपन्थै गवनव केहिभेशा ॥
देहलीराज चिन्तमनेँ काढ़ी । यहिजग जैसी दूबकी साढ़ी ॥
सेंतें मिलाय छाँछ के फेरा । मंथ घिवलीन्हमहिउकहँकेरा ॥
यहि देहली कित द्वै द्वै गये । कै कै गर्व खेहँ मिल गये ॥
यहि देहली की रही ढिलाई । साढ़ी काढ ढील जब ताई ॥
रावण लङ्क जार सत्र तापा । रहा न यौवन औ तरुनापा ॥
दो० भीख भिखारी दीजिये, का ब्राह्मण का भाट ।
अज्ञा भई वोलावहु, धरती धरा ललाटै ॥
राघव चेतन हुत जो निरासा । ततखनेँ वेगेँ वोलावा पासा ॥
शीशेँ नायके दीन्ह अशीशा । चमकत नग कंकन करदीशा ॥
अज्ञा भई सो राघव पाहां । तुइँ मंगनेँ कंकन का वाहां ॥
राघव फेर शीशेँ भुइँ धरा । जुगयुग राज भानु की करा ॥
पद्मिनि सिंहलद्वीप की रानी । रतनसेन चितोरगढ़ आनी ॥
कमलन सैर पूजी तेहि बासा । रूप न पूजी चन्द अकासा ॥
जहां कमल शेशि सूरे न पूजा । केहि सैर देउँ और को दूजा ॥
दो० सो रानी संसार मन, दछना कङ्कन दीन्ह ।
अप्सरै रूप देखायके, जीव झरोके लीन्ह ॥
सुनि के उतरै शाह मन हँसा । जानहु वीजै चमक परगसा ॥
४ मेहरबानी १ बोलाना २ राह ३ अन्देशा ४ नरमी ५-८ गरूर ६ धूर ७
जवानी ६ हुक्म १० माथा ११ नाउम्मेद १२ तुरन्त १३ जल्द १४ शिर १५-
१७ मांगनेवाला १६ सूर्य १८-२१ बराबरी १६-२२ चाँद २० परीइन्द्र-
लोक २३ जवाब २४ विजुली २५ ॥