पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २२१
सोन जरी जेहि की टकसारा। बारहबौनी परहिं दिनारा ॥
दो० कमलबखानौं जायतहँ, जहँ अलि अलाउद्दीन।
सुनिके चढ़ैभानु होय, रतन होय जलमीनै ॥
खण्ड बत्तीसवां देहली गवनराघव चेतन ॥
राघव चेतन कीन्ह पयानां। देहली नगर जाय नयराना ॥
आय शाह के द्वार जो पहुँचा। देखा राज जगतपर ऊँचा ॥
छविसलाख तुरुक असवारा। तीससहस हस्ती दरवारा ॥
जहँतक तपै जगतपर भानूँ। तहँलग राजकरै सुलतानू ॥
चहूँखंड के राजा आवहिं। ठाढ़झुराहिंजुहारैं न पावहिं ॥
मनतेवान कै राघव भूरा। नाहिं उबार जिया डर पूरा ॥
जहां झुरान दिये शिर छाता। तहँ हमार को चालै बाता ॥
दो० वारपार नहिं सूझै, लाखन उमर अमीर।
अब खुरखैहै जाव मिल, आयपरे यहिभीर ॥
बादशाह सब जाना बूझा। स्वर्गपतौरै हिये १५ में सूझा ॥
जो राजा अस सजर्गे न होई। काकर राज कहांकर कोई ॥
जगत भार वह एक सँभारा। तौथिरे रहै सकल संसारा ॥
औ असबहक सिंहासन ऊँचा। सब काहूँपर दृष्टिजो पहुँचा ॥
सब दिन राजकाज सुखभोगी। रात फिरे घरघर द्वै योगी ॥
रावरंक जहँतक सब जाती। सबकी बाँहं लेइ दिनराती ॥
पंथी २१ परदेशी जब आवहिं। सबकीचाँहें दूतपहुँचावहिं ॥
बारह् तरह १ पद्मावत की तारीफ़ २ भँवर ३ सूर्य ४-१० मछली ५
कूच ६ दरवाज़ा ७ हज़ार ८ हाथी ६ चारों तरफ़ ११ सलाम १२ टापकी
धूर १३ ज़मीन-आसमान १४ दिल १५ होशियार १६ क़ायम १७ नि-
गाह १८ अमीर गरीब १६ ख़बर २०-२२ मुसाफ़िर २१॥ : ,,, :, :-