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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 224

पद्मावत । २२३
कांच योग जो कंचन१ पावा। मंगन ताहि सुमेरु२ चढ़ावा ॥
नाउँ भिखार जीभ मुख बांची । अबहिंसँभार बातकहु सांची ॥
कहँ अस नारि जगत उपराहीं। जेहिके सरि सूरज शँशि नाहीं ॥
जो पद्मिनि तुइँ मन्दिर मोरे। सातों द्वीप जहां करै जोरे ॥
सप्तद्वीप महँ चुन चुन आनी। सो मोरे सोरहसै रानी ॥
जो उनमहँ देखेसि इक दासी । देख लोन है लोन बिलासी ॥
दो० चहूँखण्ड हौं चकवै, जस रवि तप आकाश ।
जो पद्मिनि मोरे मंदिर, अप्सर तौ कैलाश ॥
तुम बड़राज छत्रपति भारी। अन ब्राह्मण हौं अहौं भिखारी ॥
चारहुँ खण्ड भीखका बाजाँ। उदय अस्त तुम्ह ऐसो न राजा ॥
धर्मराज औ संतकुल माहां। झूठ जो कहौं जीभ गहि बाहां ॥
कुछ जौ चार सब कुछ उपराहीं। सो यहि चहूँ दीप महँ नाहीं ॥
पद्मिनि अमृत हंस सदूरू१० । सिंहलद्वीप भलाहिं सो मूरू ॥
सातों द्वीप देख हौं आवा। तब राघव चेतन कहवावा ॥
अजहूँ होय न राखौं धोखा । कहौं सो सब नारिन गुणदोखाँ ॥
दो० यहां हस्तिनी सिंहिनी, औ चित्रिनि बनबास ।
कहौं पद्मिनी पड़ै शिर, भँवर फिरै चहुँपास ॥
खण्ड तैंतीसवां स्त्री वर्णन ॥
पहिले कहौं हस्तिनी नारी। हस्ती की परकीरति१६ सारी ॥
शिर औ पांव सुझै गँय छोटी। उर की खीनं लङ्क की मोटी ॥
कुम्भस्थल गज अमित अमाहीं। गवनै गयन्द ढाल जनु बाहीं ॥
सोना १ नामबड़ाइ २ बराबरी ३ चाँद ४ हाथ ५ चारौंतरफ़ ६ सारी
दुनियांका राजा ७ सूर्य ८ पहुँचा ६ लालशेर १० असिल ११ हुक्म १२
ऐब-हुनर १३ कमल १४ हाथी १५ स्वभाव १६ मोटा १७ गर्दन १८ छाती
१६ पतली २० कमर २१ नाम हाथी २२ चाल २३ ॥