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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 221

२२० पद्मावत ।
शशि सूरहि जोहोतवहज्योती । दिनपहाड़हतरंयनि न होती ॥
तैं हँकारे मोहिं कङ्कनदीन्हा । दृष्टि जोपड़ी जीवहरलीन्हा ॥
नयनभिखार डीठि सतछुंडी । लागे तहां बान हियँ गड़ी ॥
नयनहिं नयन जो बेधसमाने । शीशँधुनहिं निसरेनहिंताने ॥
नवहिं न नाये निलज भिखारी । तबहूँ बुरी लाग मुखगारी ॥
दो० कित करमुखी नयनभै, जीव हरा तेहि बाट।
सरवरनीरबिछोह ज्यों, तरकतरक हियफाट ॥
सखिन कहा चेतनबे सँभारा । हिये चेत जिव जाय न मारा ॥
जो कोई पावै आपन मांगा। ना कोइ मरै न काहू खाँगा ॥
वह पद्मावत ऐसी सुरुपा । बरन न जाय काहके रूपा ॥
जें चीन्हीं सो गुप्तै चल गयऊ । परगटगुप्तै जीवविन भयऊ ॥
तुम अस बहुत बिमोहितभये । धुन धुन शीश जीव दै गये ॥
बहुतहिं दीन्ह नाय के ग्रीवों । उतरैं न देइ मारके जीवा ॥
तुइँ पुनि मरत होय जर भुई । अबहिं उघेल कानकी रुई ॥
दो० कोइ मांग मार ना पावै, कोइ बिन मांगा पाव ।
तूचेतन औरहिसमझावे, बहुतहिंको समझाव ॥
भयो चेत चित चेतन चेता । बहुर न आयसहों दुखएता ॥
रोवत आय परे हम जहां । रोवत चले कौन सुख तहां ॥
जहँवां बहुतसाँसू जिय केरा । कौन रहन पर चलौं सबेरा ॥
अब यहि भीख तहां होय मांगौं। यतनादे जगजन्म न खाँगों॥
औ अस कंकन जोपाऊँ दूजा। दारिद हरै आश मन पूजा ॥
देहली नगर आव तुरकानू । शाह अलाउद्दीं सुलताणू ॥
चाँद १ सूर्य २ बोलाना ३ शोख ४ ईमान छोड़ानेवाले ५ दिल ६ शिर ७
तालाब का पानी घटने से ८ कमी ९-१६ छिपा १० ज़ाहिर वां छिपा ११
आशिक़ १२ गर्दन १३ जबाब १४ अंदेशा १५ ॥