पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २१६
राघव बिजुली मारा, बेसँभरकुछ न सँभार ॥
पद्मावत हँस दीन्ह झरोखा । अब जो गुनीमरैसुहिं दोखो ॥
सबै सहेली देखी धाई । चेतन चेत जगावैं आई ॥
चेतन परा न आवै चेतू । सबहिं कहा यहि लाग परेत् ॥
कोई कहि कांपै कोईसम्पात् । कोईकहि अहि मिरगी बातू ॥
कोईकहि लागपवनै करझोला। कैसहिं समुझन चेतनबोला ॥
पुनि उठाय बैठारो छाहां । पूँछहिकौन पीर जिय माहां ॥
धौं काहू के दरशन हरा । कै ठग धूतै भूत जेहि हरा ॥
दो० कै तोहि काहू दीन्ह कुछ, कैरे डसातोहि सांप ।
कहो सो चितहोय चेतन, देह तोर कस कांप ॥
भयो सो चित चेतन जब चेता । नयन झरोखें जीव संकेताँ ॥
पुनि जो बोला मीत बुधिखोवा। नयन झरोखा लायें रोवा ॥
बावर फेर शीश पै धुना । आपन कहि न पराई सुना ॥
जानहु लाई काहुँ ठंगोरी । खने पुकार खन बांधे बोरी ॥
होरे ठगा यहि चितोर माहां । कासों कहों जाउँ केहि पाहां ॥
यहि राजा शठ बड़ हत्यारा । जेँ रखा यहि ठग बटपारो ॥
नाकोइवरजेनै लाग गुहारी । अस यहि नगर होय बटपारी ॥
दो० दृष्टि रहीठगलाडू, अलकें फाँस पर ग्रीवै ।
जहां भिखारि न बाचै, तहां बचै को जीव ॥
कित धौराहर आय झरोखें। लैगयोजोव दखनाकै धोखें ॥
स्वर्गसूर शशि करै अँजोरी । तेहितेअधिकदेउँ केहिजोरी ॥
पाप १ जूड़ी २ मिरगी को रोग ३ फालिज ४ किसीठग या दगाबाज़ने
मन्त्र चलाया ५ खिलादिया ६ कुँभलाया ७ शिर ८ जादू ९ कभी १०
छुप ११ राहलूंटनेवाले १२ मनाकरनेवाला १३ निगाह १४ बाल १५ गर्दन
१६ महल १७ सूर्य १८ चाँद १६ रोशनी २० बहुत २१ ॥