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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 179

१७८ पद्मावत ।
नागमती दुख बिरह अपारा । धर्ती स्वर्ग जरै तेहिं झारा ॥
नगरकोट घर बाहेर सूना । न्योजे १ होय घरपुरुषबहूनां ॥
तू कामरूं परा बश टोना । भूला योग छरा तोहि घेना ॥
वह तुहिं कारन मरुभइ मारा । रही नाकहोय पवन अधारा ॥
कहुँ बोलहिं लै मोकहँ खाहू । मांस न कायाँ जो रुच काहू ॥
बिरह मयूरें नाग वह नारी । तू मँजारै कर वेगि गुहारी ॥
मांस गिरा मांजर है परी । योगी अबहुँ पहुँच लै जरी ॥
दो० देख बिरह दुख ताकर, मैं सो तर्जा बनबास ।
आयोंभाग समुद्र महँ, तोह न छांड़े पास ॥
अस पुनि जरा बिरहकरगठां । मेघश्याम भये धूम जो उठा ॥
दाढ़ों राहु केतु गा दाधा । सूरज जरा चांद जर आधा ॥
औ सब नखत तँराईं जरीं । टूटहिं लूक धर्ति महँ परीं ॥
जरै सो धर्त्ती ठावहिं ठाउँ । दहक पलाशैं जरे तेहिं दाउँ ॥
बिरह श्वासतंस निकसीझारा । दहिदहि परवतहोहिंअंगारा ॥
भँवर पतंग जरै औ नागा । कोकिलभुजयल औवनकागा ॥
बन पंखी सब जिवलै उड़े । जल पक्षी जलमहँ दुख बुड़े ॥
दो० हमहुँ जरत तहँ निकसा, समुद बुझायों आय ।
समुद्र जरा पनिभा खारा, धूमरहा जग छाय ॥
राजैं कहा रे स्वर्ग सँदेशी । उतरखाव मोहिं मिलपरदेशी ॥
पांयटेक तहिं लावों हियरे १४ । परम संदेश कहो है नियरे ॥
कहा बिहंगमैं जो बनबासी । कितक गृहीते होहि उदासी ॥
परमेश्वर न करे १ खाली २ बदन ३ मोर ४ बिल्ली ५ जल्द ६ मदद ७
बूटी ८ छोड़ना ९ ढेर १० जलना ११ छोटेनखत १२ दाख १३ दिल १४
नामाचिड़िया १५ ॥