सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 180, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 180

जेहितरु१ तरितुअासन कोऊ । कोकिल काग बराबर दोऊ ॥
धर्त्ती महँ विष चारा परा। हारलै जानि भूमिपरिहरा ॥
फिरौं वियोगी डारहि डारा। करौं चले कहँ पंख सँवारा ॥
जहवां घरी घंटत नित जाहीं। सांझ जीवहै दिवसहि नाहीं॥
दो० जो लहि फेरे मुकै है, परों न पिंजरमाह ।
जाउँ वेगथल अपने, है जेहिबीच निबाह ॥
कहि संदेश विहंगम चला । आग लाय सगरे सिंहला ॥
घड़ी वीत राजा घर आवा । भायलोपैपुनिदृष्टिन आवा ॥
पंखी नाउँ न देखा पांखू । राजा रोय फिराके साखू ॥
जस हेरत वह पंख हेराना । दिनकहमहिंअसकरवपयानाँ॥
जोलहिप्राणपिंड इकठाँऊँ। एकबार चितोरगढ़ जाऊँ ॥
आवाभँवर मंदिर जहँ केवौं । जीव साथ लेगयो परेवों ॥
तन सिंहल मन चितोर वसा । जिव वेसँभरनागिनजिमडसा॥
दो० जेतनारि हँस पूँछी, अमीवचन जिमि निन्त ।
रसउतरा विष चढ़रहा, नावहि चिन्तन मिन्त ॥
वरस एक तहँ सिंहलरही । भोग विलास कीन्हजसतही ॥
भा उदास जो सुना सँदेशू । सँवरिचला मन चितोर देशू ॥
कमल उदासी देखा भँवरा । थिरै नरही मालतिमन सँवरा ॥
योगी औ मन पवन परावा । कित थिररहै जोचित्तउचाहा ॥
जो जिव काढ्देआवन कोई । योगी भँवर न आपन होई ॥
चलाकमलमालँतिहिर्ये घाली। अवकितथिरआली अलँआली॥
पेड़ १ यह चिड़िया पेड़ नहीं छोड़ती पानी पीने में भी लकड़ी पंजे में
लिये रहतीहै २ ज़मीनछोड़ी ३ दिन ४ नजात ५ नाम चिड़िया ६ गायब ७
निगाह ८ देखना ६ कूच १० वदन ११ जगह १२ कमल तथा पद्मावत १३
जानवर परिन्द १४ मीठी बात १५क़ायम १६ तथा पद्मावत १७ दिल १८ भँवर १९॥