पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ पद्मावत ।
धने सूखै भर भादों माहां । अबहुँन आयन सींचेसिनाहां ॥
पुरबा लाग भूमि जल पूरी । आँक जवास भईहौं झूरी ॥
दो० जलथल भरे अपूरसब, धर्ति गगन मिल एक ।
धन यौबन अवगाहँ महँ, वय बूड़ी पिय टेक ॥
लाग कुँवार नीर जस घटा । अबहुँ आवरे प्रीतम लुटा ॥
तुहि देखों पिय पलुहेकर्या । उतरा चीतं बहुतकर मयों ॥
उये अगस्त हस्तै तन गाजा । तुरी पलान चढ़े रण राजा ॥
चित्रा मीत मीन घर आवा । कोकिल पीव पुकारत पावा ॥
स्वाति बूँद चातृकें मुखपरी । सीप समुद्र मोति बहुभरी ॥
सरवर सँवरि हंस चलिआये । सारस कुरलैं खंजन दिखाये ॥
भई निराश कास वन फूले । कन्त न फिरे विदेशहि भूले ॥
दो० बिरहहस्ति तन शाँलै, घाय करै नितचूर ।
आय बचाओ वेगें पिय, गाजहुहोय सँदूर ॥ सिंह
कातिक शरदचन्द उजियारा । जगशीतल मोविरहिनजारा॥
चौदह किरण चन्द परकाशैं । जनहु जरै सबधर्ति अकांशू ॥
तन मन सेज करै इक दाँहू । सबकहँ चन्दभयो मोहिंराहू ॥
चहुँ खण्ड लागै अँधियारा । जो घर नाहीं कन्त पियारा ॥
अबहुँ निठुर आव यहिब़ारा । पर्व देवारी हो संसारा ॥
संगझुमकगावाहिं अँग मोरी । हों झुरवों बिछुरी जेहिजोरी ॥
जेहिघर पियसोमनोरथ पूजा । मोकहँ बिरह सौतदुखदूजा ॥
दो० सखि मानैं त्योहार सब, गाय देवारी खेल ।
औरत तथा नागमती १ खाविन्द २ नामनखत ३-१०-१२-१३-१५
ज़मीन ४ आसमान ५ गहिरा ६ पानी ७ लौटके ८ बदन हरा होजाय ६
मेहेरवानी ११ घोड़ा १४ मछली १६ पपीहा १७ तालाव १८ ममोला १६
हाथी २० छेदना २१ जल्द २२ शेर २३ रोशन २४ जलाना २५ कामना २६॥