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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 168

पद्मावत । १६७
खङ्ग बीजु चमकै चहुँ ओरा । बुन्दबान बरसहिं घन घोरा ॥
उनई घटा आय चहुँ फेरी । कंत उबार मदन हौं घेरी ॥
दादुर मोर कोकिला पीउ । गिरहि बीज घट रहै न जीउ ॥
पुष्य नक्षत्र शिर ऊपर आवा । हौं बिननाहँ मँदिर को छावा ॥
अद्रा लाग बीज भुइँ लेई । मो पिय बिन को आदर देई ॥
दो० जेहिं घर कंता ते सुखी, तेहि गारू तेहिं गर्व ।
कन्त पियारे बाहरे, हम सुख भूला सर्व ॥
सावन बरस मेह अवानी । मरन परीहौं विरह झुरानी ॥
लाग पुनरबसु पीउ न देखा । भइबावर कहँ कन्त सरेखाँ ॥
रक्त की आंसुपरहिं भुइँ टूटी । रंग चलीं जनु बीरबहूटी ॥
सखिन रचा पियसंग हिंडोला । हरियर भूमि कुसुम्भी चोला ॥
हिये हिंडोल जस डोलै मोरा । विरह झुलावै देइ झकोरा ॥
बाँटे असूझ अथाह गँभीरी । जिव बावरभा फिरै भँभीरी ॥
जगजल बूड जहाँ लग ताकी । मोरनाव खेवकै बिन थाकी ॥
दो० पर्वत समुद्र अगम वन, औ बीहड़ घन ढाँख ।
किमकर भेंटूं कन्त तुम, नामो पांव न पंख ॥
भरिभादौं दुपहर अति भारी । कैसें भरौं रयनि अँधियारी ॥
मँदिरसून पिय अन्तहि बसा । सेज नागभइ दहिदहि डंसा ॥
रहौं अकेल गहैं इक पाटी । नयन पसार मरौं हियफाटी ॥
चमकबीज घन गरजत त्राशा । विरहकालहोय जीवनिराशा ॥
बरसै मघौ झकोर झकोरी । मोरदुइनयन चुवैं ज्यों ओरी ॥
तलवार १ बिजली २ कामदेव ३ मेढक ४ ख़ाविन्द ५ गरूर ६ तुला-
हुआ ७ होशियार ८ लोहू ६ ज़मीन १० दिल ११ राह १२ गहरी १३
मल्लाह १४ नामनखत १५ ॥