पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४० पद्मावत ।
देखतका कैलासहिं, दृष्टिपाप सब भाग ॥
सातखण्ड सातों कैलासा । काबरणौं जस उत्तम बासा ॥
हीरा ईंट कपूर गिलावा । मलयागिरि ३ चन्दनसबलावा ॥
चूनाकीन्ह ओट गजमोती । मोतिहिचाह ४ अधिकतेहिज्योती ॥
बिश्वकर्महिं सैं हाथ सँवारा । सात खण्ड सातहिं चौपारा ॥
अतिनिरमलैं नहिंजायविशेखा । जसदरपनमहँदरशनदेखा ॥
भुइँ गच जनहुँ समुद्र हिलोरा । कनक ५ खम्भ जनुरचोहिंडोरा ॥
रतनपदार्थे होय उजियारा । भूले दीपक औ मसियारा ॥
दो० तहँ अप्सर पद्मावत, रतनसेन के पास ।
सातस्वर्ग हाथजनु आये, औसातों कैलास॥
पुनि तहँ रतनसेन पगधारा । जहां रतननौ सेज सँवारा ॥
पुतरी गढ़ गढ़ खम्भनकाढ़ी । जनु सजीव सेवा सब ठाढ़ी ॥
काहू हाथ चन्दन की खोरी । कोइ सेंदुर कोइ गहे सिंघौरी ॥
कोइ कुंकहि केसर लिये रहें । लावै अंगें रहस जनु चहें ॥
कोई लिये कुंकुमा चोवा । धन कब चहै ठाढ़मुखजोवौं ॥
कोइ बीरा कोइ लीन्हे बीरी । कोइपरमलअतिसुगंधसैंमीरी ॥
काहु हाथ कस्तूरी मेदू १३ । भांतिहिभांति लागसब भेदू ॥
दो० पांतिहि पांति चहूँ दिश, सब सोंधी करहाट ।
मांझै रचा इन्द्रासन, पद्मावत कहँ पौर्ट ॥
खण्ड तेईसवां मुलाक़ात पद्मावत वा
राजा रतनसेन ॥
सात खण्ड ऊपर कैलासू । तहँवाँ नारसेज सुख साजू ॥
१ निगाह २ तारीफ़ २ चन्दन ३ ज्यादा ४ पाकसाफ़ ५ सोना ६ जवाहि-
रात ७ आसमान ८ कटोरी ६ चंदन १० देखना ११ हवा १२ मुश्क १३
अम्बर १४ बीचोंबीच १५ तख़्त १६ ॥