पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 140, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंचांद सूर्य्य दुइ भांवर लीन्हीं। नखतमोत न्योछावर कीन्हीं॥
फिरहिं दोउ सतफेर गुंते के। सातहिं फेर गांठ सो एके ॥
दो० भइ भांवर न्योछावर, राजचार सब कीन्ह ।
दायज कहूं कहांलग, लिख न जाय ततदीन्ह ॥
रतनसेन जो दायज पावा। गन्ध्रवसेन आय कंठलावा ॥
मानुषचिन्तआनकुछ निन्ता। करै गुसांइन मनमहँ चिन्ता ॥
अब तुम सिंहलद्वीप गुंसाई। हम सेवक आहें सेवकाई ॥
जस चितोरगढ तुम्हरो देशू। तस तुम यहां हमार नरेंगू ॥
जम्बू दीप दूरका काजू । सिंहलद्वीप करहु नित राजू ॥
रतनसेन बिनवौं करजोरी । अस्तुति योग जीभकहँ मोरी ॥
तुम गुसाँई जे छारै छुडाई। की मानुष अति दीन्ह बड़ाई ॥
दो० जो तुम दीन्ह सो पावा, जिवों जन्मसुखभोग ।
नाहत खेहँ पाय कीं, हों योगी केहि योग ॥
धौराहर पर दीन्हा वासू । सात खण्ड जहँवां कैलासू ॥
सखी सहसँ दश सेवा पाई। जनहुँ चांदसँग नखततराई ॥
हेममंडल शशिके चहुँ पासा। शशि सूरैंहिले चढ़ी अकासा॥
चलसूरज दिन अथवै जहां । शशिनिरमलै तू पावसितहां ॥
गन्ध्रवसेन धौराहेर कीन्हा। दीन्हनराजहियोगिहिदीन्हा॥
मिलीजाहिंशशिके चहुँपाहां । सूर्य्य न चापै पावै बाहां ॥
अब योगी गुरु पायो सोई। उतरा योग भस्म गा धोई ॥
दो० सातखण्ड धौराहेरै, सात रंग नग लाग ।
गोतवाले १ राजा २ अर्ज़ करना हाथ जोड़के ३ धूर ४-५ महल ६-
१२-१५ हज़ार ७ छोटे सितारे ८ पद्मावंत ६ रतनसेन १० साफ़ ११ चाँद
तथा पद्मावंत १३ तथा राजा ख़िलवत न करसका १४ ॥