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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 130

बहुतक भुवन सोह अत्रीखा। रहे जो लाख भये ते लेखा ॥
दो० बहुतक परे समुद्रमहँ, परत न पावां खोज।
जहां गर्व तहँ पीरा, जहां हँसी तहँ रोजै ॥
फिर आगे का देखे राजा। ईश्वर केर घ्रंट रण बाजा ॥
सुना शंख जो विष्णु अपूरा। आगे हनुमत केर लँगूरा ॥
लीन्हें फिरै लोक ब्रह्माण्डा। स्वर्ग पतारलोवा म़तमण्डाँ ॥
बलि बासुकि औ इन्द्रनरेन्दू। राहु नखत सूरज औ चन्दू ॥
जामवन्त दानव राक्षस पूरे। अहंतो बह्न आय रण जुरे ॥
जेहिकर गर्व करत हत राजा। सो सब फिरि बैरी होइ साजा ॥
जहँवां महादेव रण खड़ा। शीश नाय नृप पांयन पड़ा ॥
दो० केहिकारणे रिसकीजिये, हौं सेवक औ चेर।
जेहिचाही तेहि दीजिये, बारि गुसाई केर ॥
जब महेश उठ कीन्हवसीठी। पहिले कडू अन्तहोय मीठी ॥
तू गन्ध्रब राजा जग पूजा। गुण चौदह सिख देइको दूजा॥
हीरामन जो तुम्हार परेवां। गा चितौर औ कीन्हेसि सेवा ॥
तेहि बुलाय पूँछौ वह देशू। औ पूँछौ योगिहि जस बेशू ॥
हमरे कहत रोप नहिं मानो। जो वह कहै सोई परमानो ॥
जहां बारितहँ आववर ओका। कर विवाह धर्म बड़ तोका ॥
जौ पहिले मन माननकांधे। परखै रतन गांठ तब बांधे ॥
दो० रतन छिपाये ना छिपै, पारख होय सो पेष।
बाल कसौटी दीजिये, कनक कचोरी वेष ॥


१ फिरना २ बीच ३ मगर ३-११ रोना ४ महादेव जी ५-१५ जमीन ६ नाम राजा दैत्य ७ नाम राजी सांप ८ राजा ६-१२ पत्थर १० वास्ते १३ लड़की १४ वकालत १६ जानवर परिन्द १७ यकीन १८ सोने की कटोरी १६॥