पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३८ पद्मावत ।
भीखलेहु फिर मांगो आगे । यहि सब रयैंनि रहै गढ़लागे ॥
जसचहि इच्छै चहूँतेहिदीन्हा । नाहिं बेध शूली जिवलीन्हा॥
जेहि अससाधहोय जिवखोवा । सो पतंग दीपक तस रोवा॥
सुर नर मुनि गुनि गन्ध्रव देवा । तेहिं को गिने करहिं नितसेवा॥
दो० मोसों को सरवर्र करै, अरे सुनि झूठे भाट ।
क्षार होय जो चाजौं, गर्जै हस्तिर्न के ठाट॥
योगी धर मेले सब पाछे । उरये मालँ आये रण काछे ॥
मंत्रिन्र कहा सुनो हो राजा । देखहु अब योगिनकर काजा॥
हमजो कहा तुमकरहुंन जूझं । होत आवदेरं जगतअसूझा॥
खंने इकमहँ झुरमटहो बीता । दरमहँ चढ़ै जोरहै सोजीता ॥
कै धीरज राजा तब कोंपा । अङ्गद आय पांव रण रोपा ॥
हस्तिं पांच जो अगमनैं धाये । तें अङ्गद धर सूंडि फिराये॥
दीन्ह उड़ाय स्वर्ग कहँ गये । लौट न फिरैं तहहिं के भये ॥
दो० देखत रहें अचम्भो योगी, हस्ती बहुरन आय ।
योगीकर अस जूझव, भूमि न लागत पाँय॥
कहहिं बात योगी हम पाये । छिन इक मांह चहतहैं धाये ॥
जौ लहि धावहिं असका खेलहु । हस्तिहिंकर जूहे सब पेलहु ॥
जोगर्र्ज पेल होय रण आगे । तस वगमेल करहु संग लागे ॥
हस्ति की जूह आय अंगसारी । हनुमत तबै लँगूर पसारी ॥
जोहिसो सैनं बीच रण आई । सबै लपेट लँगूर चलाई ॥
बहुतक टूट भये नौ खण्डा । बहुतक जायपरे ब्रह्माण्डौ ॥
रात १ चाहना २ बराबरी ३ राख ४ हाथी मस्त ५ हाथी ६ पहलवान ७
सलाहकार ८ लड़ाई ६ फ़ौज १० पल ११ बालि का बेटा १२ हाथी १३
पहिले १४ आसमान १५-२१ ज़मीन १६ हलका १७ मस्त हाथी १८
मुक़ाबिला १६ फ़ौज २० ॥