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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 131

१३० पद्मावत ।
हीरामन जो राजैं सुना । रोषे¹ बुझाय हिये² महँ गुना ॥
आज्ञाभई बोलावहु सोई । पण्डितहूते दोषै³ नहिं होई ॥
एक कहत सहसर्कै⁴ दशधाये । हीरामनहिं वेग लै आये ॥
खोला आगे आन मँजूसाँ⁵ । मिलानिकसिबहुदिनकररूसा॥
अस्तुति करत मिला बहुभांती⁶ । राजैं सुना हिये भइ शांती⁷ ॥
जानौं जरत अगिन जलपरा । होयफुलवाररहस हियभरा ॥
राजैं मिल पूँछी हँस बाता । कसतन पियर वरन मुखराताँ⁸ ॥
दो० चतुरबेदतुम पण्डित, पढ़े शास्त्र वो वेद ।
कहां चढ़े योगीगढ़, आन कीन्ह घर भेद ॥
हीरामन रसनाँ रस खोला । दैअशीश औ अस्तुति बोला ॥
इन्द्रराज राजेश्वर महा । सुनिहियैं रिसकुछ जाय न कहा॥
पै जो बात होय भल आगे । सेवक निडर कहै रिस लागे ॥
सुवा सुफल अमृत पैखोजा । होय न विक्रमें राजा भोजा ॥
हौं सेवक तुम आदि गुसांई । सेवा करों जियों जब तांई ॥
जो जिव दीन्ह देखावा देशू । सोपै जिय महँ बसै नरेशू ॥
जो वह सँवरै एकै तोहीं । सोई पंख जगत रतिमोहीं ॥
दो० नयन बैन औ श्रवण, सबही तोर प्रसाद ।
सेवा मोर यही नित, बोलों आशिरबाद ॥
जो अस सेवक जेहि तपँकसा । तेहिक जीभ पै अमृत वसा ॥
तेहिं सेवक कै करमहिं दोषू । सेवा करत करै पतिरोषू ॥
औ जेहिदोष निदोषहिं लागा । सेवक डरा जीव लै भागा ॥
गुस्सा १-१६ दिल २-११ क़सूर ३-१८ हज़ार ४ पिंजरा ५ बहुत
तरह ६ तसल्ली ७ लाल ८ चार ६ ज़बान १० राजा विक्रमादित्य १२ सबसे
पहिले १३ राजा १४ लालमुँह १५ आँख ज़बान कान १६ मेहनत की १७
बेक़सूर २० ॥