सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 128

पद्मावत। १२७
जो सत पूँछेसि गन्ध्रब राजा। सत पै कहूँ परे नहिं गाजा ॥
भाटहि काहि मीचसों डरना। हाथ कटार पेट हन मरना ॥
जम्बूद्वीप चितावर देशू । चित्रसेन बड़ तहां नरेशू ॥
रतनसेन यहि तांकर बेटा। कुल चौहान जाय नहिं मेटा ॥
खांडेअंचल सुमेरु सुभारू । टरै न जो लागै संसारू ॥
दान सुमेरु देत नहिं खांगो। जो यह मांग न औरहि मांगा ॥
दाहिन हाथ उठायों ताही। और को अस वरभावो जाही ॥
दो० नाउँ महापात्र गुहिं, तेहेकि भिखारी डीठँ ।
रिसलागे खरिवात कहि, खरि पै कहै वसीठँ ॥
ततखनं सुनि महेश मनलाजा। भाटकिरंनि है विनवां राजा ॥
गन्ध्रबसेन तू राजा महां। हों महेश मूरत सुनि कहा ॥
पै जो बात होय भल आगे। कहा चही काभा रिस लागे ॥
राजकुँवर यहिहोहिं न योगी। सुनि पद्मावत भयो वियोगी ॥
जम्बूद्वीप राजघर बेटा। जोहै लिखा सो जाय न मेटा ॥
तूरै सुवै जाय वह आना। औ जाकर बिरोकै तैमाना ॥
पुनि यह बात सुनीशिवलोका। कर सुविवाह धर्म है तोका ॥
दो० मांग भीख खप्पर लिये, मुये न छांड़ै बौरै।
चूमदेखजो कनककचौरी, भीखदेह नहिंमार ॥
औ हेंट होहरे भाट भिखारी। का तू मोहिं देइ अस गारी ॥
को मोहियोगीं जगतहोइपारा। जासों हेरों जाय पतारा ॥
योगी यती आव जित कोई। सुनत त्रासे मान भा सोई ॥
बिजुली १, राजा २ तलवार बहादुर ३ कमी ४ शोख ५ वकील ६
उसी वक्त ७ महादेवजी ८ मानिन्द ९ तारीफ़ १० कहामान ११ दुःखी १२
गुस्सा १३ दरवाज़ा १४ सोने की कटोरी १५ दूर हो १६ लायक १७
देखना १८ डर १६ ॥