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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 124

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पद्मावत। ५२३
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बेगे होहु मोहिं मारहु, जन चालहु यह बात ॥
कहहिंसँवरि जेहि चाहेसिसँवरा। हमतुमकरहिं केतिकर भँवरा॥
कहेसि वही संवरों हर फेरा। मुयेजीत आहों जेहि केरा ॥
औ सुमिरों पद्मावत रामा। यहिजिवन्योछावरतेहिनामा ॥
रक्त की बूँद कया जब परहीं। पद्मावत पद्मावत कहहीं ॥
रहे तो बूँद बूँद महँ ठाँऊँ। परहुँ तो सोई लै लै नाऊँ ॥
रोम रोम तन तासो ओधो। सूतैहि सूत बेध जिवसोधो ॥
हाड़हिहाड़ शब्द सो होई। नस नस माँह उठै धुनिसोई ॥
दो० खाय बिरह गांताकर, गूद मांस किये हान।
हों पुनि सांचा होयरहा, वहकी रूप समानाँ॥
योगिहि जबहिं गाढ़ै असपरा। महादेव कर आसन टरा ॥
औ हँसि पार्वती सो कहा। जानहुसूर गहन असगहा ॥
आज चढ़े गढ़ ऊपर तपी। राजैं गहा सूर तब छिपा ॥
जग देखेगा कौतुकै आजू। कीन्हें तपा मारे कहँ साजू ॥
पार्वती सुनि पाँयन परी। चलौ महेश देखें इक घरी ॥
भेष भाट भाटिन कर कीन्हा। औ हनुमन्तवीर सँगलीन्हा॥
आय गुसँ है देखन लागे। वहसूरति कस सती सभोंगे ॥
दो० कटकै असुझदेखके आपन, राजागर्व करेय।
दईकीदिशाँ न देखे, वह काकहँ जयै देय ॥
आसन लिये रहा हो तपा। पद्मावत पद्मावत जपा ॥
मन समाध तासों धुन लांगी। जेहिदरशन कारण बैरागी ॥

जल्द १ चंदन २ जगह ३ बेधना ४ सुराख ५ आवाज़ ६ समाना ७
मुशकिल ८ सूर्य ९ योगी १० तमाशा ११ महादेवजी १२ छिपकर १३
सतीकी तरह क़ायम १४ फ़ौज १५ ग़रूर १६ ईश्वरकी तरफ़ १७ जीत १८॥