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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 125

१२४ पद्मावत ।
रहा समाय रूप वह नाऊँ। और न सूझ वारे जहँ जाऊँ ॥
औ महेशँ कहँकरो अदेशू। जेहि यहपन्थै दीन्ह उपदेशू ॥
पार्बती पुनि सत्य सराहा। औ फिरमुख महेश करजाहौं ॥
हिये महेशँ भईजोमहेशी। कित शिरनावहिं ये परदेशी ॥
मरतेहुँ लीन्ह तुम्हारा नाऊँ। तुमचित कीन्ह रही यहठाँऊँ ॥
दो० मारतही परदेशी, राखलेहु यहि वीर।
कोइ काहू कर नाहीं, जो हो चलै न तीर ॥
लै संदेश सोंटों गा तहाँ। शूली देहिं रतन को जहां ॥
देख रतन हीरामन रोवा। राजा जिव लोगनहठ खोवा ॥
देख रोदनै हीरामन केरा। रोवहिं सब राजा मुखहेरों ॥
मांगहिं सब विधीनों सों रोई। की उपकोरै छुड़ावै कोई ॥
कहि सँदेश सब विपतिसुनाई। बिकल बहुत कुछकहीनजाई ॥
काढ़ प्रान बैठ लिये हाथा। मरै तो मरों जियो इक साथा ॥
सुनि सँदेश राजा तब हँसा। प्रान प्रान घट घट महँ वसा ॥
दो० हीरामन औ भाट दसौंधी, भये जिवपर इकठाउँ ।
चल सो जाय अब देख तहँ, जहँ बैठो रहिराउँ ॥
राजा रहा दृष्टि १५ कै औंधी। रहिनसका तब भाट दसौंधी ॥
कहेसि मेलकै हाथ कटारी। पुरुप न आछे बैठि पिटारी ॥
कान्ह कोप कै मारा कंसू। गोकुल मांझ बजावा वंसू ॥
गन्धबसेन जहां रिस बाढ़ा। जाय भाट आगे भा ठाढ़ा ॥
ठाढ़ देख सब राजा राऊ। बायें हाथ दीन्ह वरभाँऊ ॥
दरवाज़ा १ महादेवजी २-७ सलाम ३ राह ४ देखना ५ दिल ६
मेहरबानी ८ जगह ६ तोत्ता १० रोना ११ देखना १२ ईश्वर १३
कोशिश १४ निगाह १५ आशीर्वाद १६ ॥