पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 123, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें१३२ पद्मावत ।
तुम कहँ पाटँ हिये² में साजा । अब तुम मोर दुहूँ जगराजा ॥
दो० जोरीजियहिं मिलगलरहै, मरहिं तोएकहिं दोउ ।
तुमपै जियनहोयकछु, मोजियहोयसोहोउ ॥
खण्डइक़ीसवां शूलीखण्डरतनसेन ॥
बाँधतपौ आनी जहँ शूरी । जुरेआय सब सिंहल पूरी ॥
पहिले गुरूदेय कहँ आना । देखरूप सब कोउ पछताना ॥
लोगकहें यहि होय न योगी । राजकुँवर कोउअहैवियोगीँ ॥
काहू लाग भयो है तपा । हिये सुम्राल केर मुखजपा ॥
जस मारे कहँ बाजा तूरूँ । शूरीदेख हँसा मन्मूरूँ ॥
चमके दशनँ भयो उजियारा । जो जहँ तहां वीज असमारा॥
योगी केर करो पै खोजूं । मंगे यहिहोय न राजा भोजू ॥
दो० सब पूँछहिं कहु योगी, जात जन्म औ नाउ ।
जहाँ ठाँव रावकर, हँसा सो कहु केहिभाउ ॥
का पूँछौ अब जात हमारी । हम योगी औ तपा भिखारी ॥
योगी जात कौन हो राजा । गारिन कोहमोरैं नहिं लाजा ॥
निलज भिखारलाजजेहिं खोई । तेहिकी खोज परै जन कोई ॥
जाकर जीव मरे पर बसा । शूरीदेख सो कसनहिं हँसा ॥
आज नेहसों होय निबेरौँ । आजभूमि¹⁴ तजें गगनें बसेरा॥
आज कर्या पिंजर बँद टूटा । आजहिं प्रान परेवां छूटा ॥
आज नेह सो होय नियारा । आज प्रेमसँग चला पियारा ॥
दो० आजअबध सरै पहुँची, गयेजाउँमुखराँते ।
तख़्त-१ दिल २-५-योगी ३ दुखी ४ नामवाजा ६ नाम मर्द
कामिल ७ दांत ८ बिजुली ९ तलाश १० शायद ११ गुस्सा १२ जुदाई १३-१६
ज़मीन १४ छोड़ना १५ आसमान १६ चढ़न १७ उड़नेवाला १८ हद २०
बराबर २१ लाल २२ ॥