पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। ११३
कहहिं बेद पंडित पढ़ बेदी। योग भँवर जसमालति भेदी ॥
जैसे चोर सेंध शिर मेलहिं। तस ये दोउ जीव पर खेलहिं ॥
पंथे नहिं चलहिंबेदजस लिखी। स्वर्गजाय शूलीचढ़ि सिखी ॥
चोर होय शूली पर मोषू। देजो शूली तेहि नहिं दोषू ॥
चोर पुकार बेध घर मूसा। खोलो राज भँडार मंजूसों ॥
दो० जसयेहि राजमंदिर कहँ, दीन्हरयन होय सेंध ।
तैसो इन्ह कहँ मोषहोय, मारहु शूली बेध ॥
खण्डबीसवां मन्त्रीखण्ड गन्धर्वसेन ॥
रांध जो मन्त्री बोले सोई। एसो जो चोर सिद्ध पै कोई ॥
सिद्ध निशंक रयनदिन भोहीं। ताकों जहां तहां अपसोहीं ॥
सिद्ध निडरपै अपने जीवा। स्वर्ग देख वो नावहि ग्रीवा ॥
सिद्ध जाय पै जिवं बघतहां। औरहिं मरन पंख अस कहां ॥
सिद्ध अमर कायो जसपारा। जरहिं मरहिं परजाय न मारा ॥
चढ़ा जो कोप गगन उपराहीं। थोरे साज मरै ते नाहीं ॥
जम्बुकै जूझचढ़े जो राजा। सिंह साजके चढ़े सो छाजा ॥
दो० छेरहि काज कृष्ण करसाजा, राजा चढ़े रिसाय ।
सिद्धगिद्धजहँहृष्टि गगनमहँ, बिनछरकुबनाबिसाय॥
आवहु करहुकदैरै मससाजू। चढ़हिं बजाय जहालगिराजू ॥
होहसंजोवलै कुँवरजो भोगी। सब दललैकैघरहु अब योगी॥
चौबिसलाख छत्रपति साजे। छपनकोटि दैं बाजनबाजे ॥
राह १ नजात २ पाप ३ सन्दूक ४ मर्दैकामिल ५ फिरना ६ देखना ७
पहुँचना ८ गर्दन ६ हमेशाज़िन्दा १० बदन ११ आसमान १२ सियार १३
शेर १४ फ़रेब १५ निगाह १६ लश्कर तय्यार हो १७ मुक़ाबिला १८
राजा १६ फ़ौज २० ॥