न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहोनेसे प्रत्यक्ष होसकताहै द्व्यणुकका महत्त्वपरिमाणके अभावसे प्रत्यक्ष नहीं होसकता;
इसीनियमसे तुम्हारे मतमें तो निर्वाह नहीं होसकता, क्योंकि आपने परमाणुपुंजहीका
प्रत्यक्ष माना है और परमाणुमें महत्त्वरूप कारणके अभावसे प्रत्यक्ष योग्यता नहीं है.
इत्थं चावयवसिद्धौ तेषामुत्पादविनाशयोः प्रत्यक्षत्वाद नित्यत्व-
म्। तेषांचावयवधाराया अनन्तत्वे मेरुसर्षपयोरपि साम्यप्रसंगः ।
अतः क्वचिद्विश्रामो वाच्यः । यत्र च विश्रामस्तस्याऽनित्यत्वे
त्वसमवेतभावकार्योत्पत्तिप्रसङ्ग इति तस्य नित्यत्वम्। महत्प-
रिमाणतारतम्यस्य गगनादौ विश्रान्तत्वमिवाणुपरिमाणतार-
तम्यस्यापि क्वचिद्विश्रान्तत्वमस्तीति तस्य परमाणुत्वसिद्धिः ।
भाषा--इस पूर्वोक्तविचारसे (अवयवी) कार्यद्रव्यकी सिद्धि हुई तो उन कार्यद्रव्योंको
उत्पन्न विनष्ट होनेसे अनित्यत्व स्पष्ट है; उन कार्यद्रव्योंकी अवयवपरंपरा यदि असं-
ख्यात मानी जाय तो मेरुपर्वत तथा (सर्षप) सरसोंके दानेकी तुल्यता होनीचाहिये; याते
किसी एक स्थलमें अवयवपरंपराका विश्राम कहना उचितहै. जहां अवयवपरंपराका
पर्यवसान है यदि उसको अनित्य मानाजाय तो समवायिकारणसे विनाही भावकार्य-
की उत्पत्ति होनी चाहिये; सो तो संभव नहीं, याते अवयवपरंपराकी विश्राम
अवधिको नित्य मानना उचित है. जैसे महत्परिमाणकी न्यूनाधिकता त्रसरेणुसे लेकर
आकाशादिकोंमें विश्रामको प्राप्त होतीहै वैसेही अणुपरिमाणकी न्यूनाधिकताकी
विश्रान्तिकी अवधिभी कहीं कहनी उचित है. अणुपरिमाणकी न्यूनाधिकताकी
विश्रान्तिकी अवधि जहां है वही परमाणु है. इसरीतिसे परमाणुकी सिद्धि होसकतीहै.
न च त्रसरेणावेव विश्रमोऽस्त्विति वाच्यम् । त्रसरेणुः सावयवः
चाक्षुषद्रव्यत्वाद्धटवदित्यनुमानेन तदवयवसिद्धौ, त्रसरेणोरव-
यवाः सावयवा महदवयवत्वात् कपालवदित्यनुमानेन तद्व-
यवसिद्धेः ।
शंका-अणुपरिमाणकी विश्रामावधि त्रसरेणुहीमें मानलें तो दोष क्या है? समा०--
त्रसरेणु घटकी तरह नेत्रग्राह्य होनेसे सावयवहैं. इस अनुमानसे त्रसरेणुके अवयव सिद्ध
होनेसे पश्चात् त्रसरेणुके अवयवभी त्रसरेणुरूप महान्कार्यके आरम्भक होनेसे साव-
यव हैं जैसे कपाल घटरूप महान् कार्यके आरम्भक होनेसे सावयव हैं. इस
अनुमानसे त्रसरेणुके अवयवोंकेभी अवयव सिद्ध होसकते हैं.