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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 346, कुल 350 में से

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पृष्ठ 346

३२२ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ गुण-
समा०-इसका उत्तर मूलकार 'वीची' इत्यादि ग्रन्थसे स्वयं लिखतेहैं-
वीचीतरङ्गन्यायेन तदुत्पत्तिस्तु कीर्तिता ॥
भाषा-वीची तरङ्गन्यायसे अर्थात् जलऊर्मितरङ्गोंके सर्व ओर प्रसरणवत् शब्दकी
श्रोत्रावच्छेदेन उत्पत्ति कथन करीहै.
आद्यशब्देन बहिर्देशदिगवच्छिन्नोऽन्यः शब्दस्तेनैव शब्देन
जन्यते तेन चापरस्त्व्यापकः। एवंकमेण श्रोत्रोत्पन्नो गृह्यत इति ।
भाषा-प्रथमशब्दसे बाह्य दशादिगवच्छेदेन शब्दान्तरकी उत्पत्ति होतीहै अर्थात्
जैसे जलमें लोष्टादिके फेंकनेसे प्रथम एक तरङ्ग उत्पन्न होताहै, पश्चात् उसी प्रथम-
तरङ्गसे चारों ओर अनेक वीचीतरङ्ग उत्पन्न हुए कूलतक जातेहैं वैसेही मृदङ्गादिके
टंकारसेभी प्रथम एक शब्द उत्पन्न होताहै पश्चात् उसी शब्दसे दशोंदिशामें शब्दा-
न्तर उत्पन्न होतेहैं. उनसे पुनः शब्दान्तरोंकी उत्पत्ति होतीहै; इसी क्रमसे मृदङ्गदेशगत
शब्द श्रोत्रावच्छेदेन उत्पन्न हुआ ग्रहण होताहै.
कदम्बगोलकन्यायादुत्पत्तिः कस्यचिन्मते॥ १६६॥
भाषा-कदम्बगोलकन्यायसे अर्थात् जैसे कदम्बपुष्पमें गोलाकारता उत्पन्न
होतीहै वैसेही शब्दकी उत्पत्तिभी किसीएक विद्वान्ने मानीहै ॥ १६६ ॥
कदम्बेति । आद्यशब्दाद्दशसु दिक्षु दश शब्दा उत्पद्यन्ते, तत-
श्चान्ये दश शब्दा उत्पद्यन्त इति भावः।अस्मिन् कल्पे कल्प-
नागौरवादुक्तं कस्यचिन्मत इति ॥ १६६ ॥
भाषा-भाव यह कि-जैसे कदम्बपुष्पके मध्यमें एक कलिका पश्चात् चारोंओर
दश कलिका ऐसेही आगे चारोंओर लगनेसे एक गोल गुच्छ बनजाताहै वैसेही मृद-
ङ्गादिदेशगत आद्यशब्दसे दशोंदिशाओंमें दश शब्द उत्पन्न होतेहैं पश्चात् उस एक एकसे
पुनः दश दश शब्द उत्पन्न होतेहैं. इस रीतिसेभी शब्दकी उत्पत्ति श्रोत्रदेशमें होसक-
तीहै. मूलमें ' कस्यचिन्मते ' इस कहनेका भाव यह है कि-इस मतमें अनन्तशब्दों-
की कल्पना करनेमें कल्पना गौरव है ॥१६६॥
ननु शब्दस्य नित्यत्वादुत्पत्तिः कथमत आह, उत्पन्न इति-
शंका-शब्द तो नित्य है. आपने उसकी उत्पत्ति कैसे कही ? समाधान-इसका
उत्तर 'उत्पन्नः कः' इत्यादि ग्रन्थसे मूलकार स्वयं लिखतेहैं-
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