न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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तत्र बाधादिष्टसाधनत्वं कृतिसाध्यत्वं च न विध्यर्थः, किंतु बल-
वदनिष्टाननुबन्धित्वमात्रं तदभावश्च नञा बोध्यते । अथवा बल-
वदनिष्टाननुबन्धित्वविशिष्टेष्टसाधनत्वे सति कृतिसाध्यत्वं विध्य-
र्थः तदभावश्च नञा बोध्यमानो विशिष्टाभावो विशेष्यवति विशे-
षणाभावे विश्राम्यति ।
समाधान—ऐसे स्थलमें यह अर्थ बाधित है इसलिये ऐसे स्थलमें इष्टसाधनत्व
या कृतिसाध्यत्व विध्यर्थ नहीं है किन्तु ऐसे स्थलमें केवल बलवदनिष्टाननुबन्धित्व
मात्रही विध्यर्थ है उस बलवदनिष्टाननुबन्धित्वका अभाव नञसे बोधित होताहै. भाव
यह कि—इष्टसाधनत्व कृतिसाध्यत्व तथा बलवदनिष्टाननुबन्धित्व इस भेदसे विध्यर्थके
तीन अंश है उनमें विधिद्वारा किसीस्थलमें किसी अंशका बोध होताहै और किसी
स्थलमें किसीका, एवं जहां जिस अंशका