न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२९४ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ गुण-
तथाहि । ज्ञानेन प्रवृत्तौ जननीयायां चिकीर्षातिरिक्तं नापेक्षित-
मस्ति, सा च कृतिसाध्यताज्ञानसाध्या, इच्छायाः स्वप्रकारप्रका-
रकधीसाध्यत्वनियमात् । चिकीर्षा हि कृतिसाध्यत्वप्रकारि-
केच्छा ।
भाषा-( तथाहि ) " इदं मत्कृतिसाध्यम् " इत्याकारक कृतिसाध्यत्वप्रकारक
ज्ञानको प्रवृत्तिजननमें चिकीर्षासे अतिरिक्त किञ्चिदपि अपेक्षित नहीं है, किन्तु
मध्यमें व्यापाररूपेण केवल चिकीर्षा अपेक्षित है, वह चिकीर्षा कृतिसाध्यत्वप्रकार-
कज्ञानजन्या है क्योंकि यह नियम है कि-यद्विशेष्यक यत्प्रकारक इच्छा होतीहै
वह अवश्य तद्विशेष्यकतत्प्रकारकज्ञानजन्या होतीहै और कृतिसाध्यत्वप्रकारक
इच्छाहीका नाम ' चिकीर्षा ' है.
तत्र कृतिसाध्यत्वं प्रकारस्तत्प्रकारकज्ञानं चिकीर्षायां तद्वारा
प्रवृत्तौ च हेतुः, न त्विष्टसाधनताज्ञानं तत्र हेतुः, कृत्यसाध्येऽपि
चन्द्रमण्डलानयनादौ प्रवृत्त्यापत्तेः ।
भाषा-( तत्र ) उस इच्छामें ' कृतिसाध्यत्व ' रूप धर्मका प्रकाररूपेण भान है.
( तत्प्रकारक ) तादृश कृतिसाध्यत्वप्रकारक ज्ञान चिकीर्षामें तथा चिकीर्षाद्वारा
प्रवृत्तिमें कारण है. एवं इष्टसाधनताज्ञानको प्रवृत्तिमें जनकता नहीं है. यदि इष्टसा-
धनत्वप्रकारक ज्ञानकोभी प्रवृत्तिजनकता होय तो पुरुषप्रयत्नसे असाध्य चन्द्रमण्डलके
आनयनादिकोंमेंभी पुरुषकी प्रवृत्ति हुई चाहिये.
ननु कृत्यसाध्यताज्ञानं प्रतिबन्धकमिति चेत् । न । तदभावापेक्ष-
या कृतिसाध्यताज्ञानस्य लघुत्वात् ।
भाषा-ऐसे स्थलमें यदि " चन्द्रमण्डलानयनं मत्प्रयत्नासाध्यम् " इत्याकारक
ज्ञानको प्रवृत्तिके प्रति प्रतिबन्धकता कहो तो यहभी उचित नहीं, क्योंकि प्रतिबन्ध-
काभावमें कारणता माननेकी अपेक्षासे कृतिसाध्यत्वप्रकारकज्ञानमें कारणता माननेमें
लाघव है. भाव यह कि--कृत्यसाध्यत्वप्रकारक ज्ञानको प्रतिबन्धक मानकर तादृश
प्रतिबन्धकाभावको अर्थात् कृतिसाध्यत्वप्रकारक ज्ञानको आपने प्रवृत्तिके प्रति कारण
मानना होगा इससे केवल कृतिसाध्यत्वप्रकारक ज्ञानमें कारणता माननेमें लाघव है.
न च द्वयोरपि हेतुत्वम् । गौरवात् ।
शंका-कृतिसाध्यत्वप्रकारक ज्ञान तथा इष्टसाधनत्वप्रकारक ज्ञान ये दोनोंही यदि