न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८२ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ गुण-
केचित्तु सत्प्रतिपक्षोत्थापनमुपाधेः फलम् । तथाहि । 'अयोगोल-
कं धूमवद्वह्नेः' इत्यादावयोगोलकं धूमाभाववदार्द्रेन्धनाभावा-
दिति सत्प्रतिपक्षसम्भवात् । इत्थं च साधनव्यापकोपि क्वचिदु-
पाधिः यथा करका पृथिवी कठिनसंयोगवत्त्वात् इत्यादावनु-
ष्णाशीतस्पर्शवत्त्वम् ।
भाषा-कोईएक विद्वान् लोग विरोधिहेतुका उत्थापन करदेनाही उपाधिका
प्रयोजन मानतेहैं. ( तथाहि ) जैसे " अयोगोलकं धूमवत् वह्नेः " इत्यादि स्थलमें
"अयोगोलकं धूमाभाववत् धूमव्यापकार्द्रेन्धनसंयोगाभावात्" इत्याकारक विरोधिहे-
तुका सम्भव होसकताहै. ( इत्थञ्च ) एवं विरोधिहेतु उत्थापकत्वेन उपाधिको दूषकत्व
माननेसे किसीएक स्थलविशेषमें साधनका व्यापकभी उपाधिरूप धर्म होताहै जैसे
"वर्षोपलः पृथिवी कठिनसंयोगवत्त्वात् " इत्यादि स्थलमें 'अनुष्णाशीतस्पर्शवत्त्व'
उपाधि है, इस उपाधिसे प्रकृतहेतुमें व्यभिचारानुमान तो नहीं होसकता परन्तु "वर्षो-
पलः पृथिवीत्वाभाववान् कठिनसंयोगव्यापकीभूतानुष्णाशीतस्पर्शवत्त्वाभावात् " इत्या-
कारक सत्प्रतिपक्ष कहसकतेहैं.
न चात्र स्वरूपासिद्धिरेव दूषणमिति वाच्यम्। सर्वत्रोपाधेर्दूष-
णान्तरसाङ्कर्यादत्र च साध्यव्यापकःपक्षावृत्तिरुपाधिरितिवदन्ति ।
शंका-करका उसी कालमें पिघलके जलरूप होजाती है, इसलिये उसमें कठिन
संयोग वस्तुतः नहीं, एवं ऐसे स्थलमें पक्षेहेत्वाभावरूप स्वरूपासिद्धि दोषही कहना
उचित है. समाधान-उपाधिदोषका सर्वस्थलोंमें दोषान्तरोंके साथ सांकर्य रह-
ताहै अर्थात् ऐसा स्थल कोई एकभी दुर्लभ है कि जिसमें केवल उपाधिदोषही होय
तथा दोषान्तरोंका सम्भव न होसके ( अत्रच ) इस सत्प्रतिपक्ष उत्थापकत्वपक्षमें
विद्वान् लोग साध्यके व्यापक तथा पक्षमें न रहनेवाले धर्मको उपाधि कहते हैं.
शब्दोपमानयोर्नैव पृथक् प्रामाण्यमिष्यते ॥१४० ॥
अनुमानगतार्थत्वादिति वैशेषिकं मतम् ॥
भाषा-( वैशेषिक ) कणादमुनिके सिद्धान्तमें शब्द तथा उपमान स्वतन्त्र
प्रमाण नहीं है ॥ १४० ॥ किन्तु इन दोनोंकी अनुमानहीमें गतार्थता है.
शब्दोपमानयोरिति। वैशेषिकाणां मते प्रत्यक्षमनुमानं च प्रमा-
णम् । शब्दोपमानयोस्त्वनुमानविधयैव प्रामाण्यम् । तथाहि