न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
पृष्ठ 275, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें: तृतीयः स्यात्–
Line 19: भाषा–अप्राप्त द्रव्योंके परस्पर ( प्राप्ति ) मिलापका नाम ‘ संयोग ’है; वह
Line 20: संयोग तीन प्रकारका है. उनमें प्रथम अन्यतर क्रियासे उत्पन्न होताहै ॥ ११५ ॥
Line 21: दूसरा उभयक्रियासे उत्पन्न होताहै और तीसरा संयोगसे संयोग उत्पन्न होताहै.
Line 22: इनमें प्रथम पर्वत पक्षी आदिकोंका संयोग है अर्थात् पर्वत अचल है, केवल पक्षीआ-
Line 23: दिकी क्रियासे पर्वतमें संयोग होताहै ॥ ११६ ॥ एवं परस्पर ( मेष ) मेढेआदिका
Line 24: ( सन्निपात ) टक्कर लगनारूप दूसरा संयोग है अर्थात् ऐसा संयोग उभयत्र क्रिया
Line 25: हो तो होताहै. एवं कपालवृक्षके संयोगसे होनेवाला घटवृक्षका संयोग ॥ ११७ ॥
Line 26: तीसरा संयोग है.
Line 27: सन्निपातः संयोगः । द्वितीय उभयकर्मजः ॥ ११६ ॥ ११७॥
Line 28: तृतीय इति, संयोगज इत्यर्थः । तृतीयः स्यादिति च पूर्वेणान्वितम् ।
Let's check line 27:
सन्निपातः संयोगः । द्वितीय उभयकर्मजः ॥ ११६ ॥ ११७॥
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