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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 271, कुल 350 में से

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पृष्ठ 271

परिच्छेदः ५ ] भाषाटीकासमेता. २४७
परिमाणं चाश्रयनाशादेव नश्यतीत्याह, नाश इति-
भाषा-उस परिमाणका स्वाश्रय नाश होनेसे नाश होताहै; इसीको ' नाशस्तु '
इत्यादि ग्रन्थसे कहतेहैं.
-नाशस्त्वाश्रयनाशतः॥
अर्थात् परिमाणस्यैव।
भाषा-उस परिमाणका अपने आश्रयद्रव्यके नाश होनेसे नाश होताहै अर्थात्
आश्रयद्रव्यके नाश मात्रसे केवल परिमाणहीका नाश होताहै, गुणान्तरका नहीं.
न चावयविनाशः कथं परिमाणनाशकः, सत्यप्यवयविनि त्रिच-
तुरादिपरमाणुविश्लेषे तदुपचये चावयविनः प्रत्यभिज्ञानेऽपि प-
रिमाणान्तरस्य प्रत्यक्षसिद्धत्वादिति वाच्यम् ।
शंका-अवयवीका नाश उसके परिमाणका नाशक तो नहीं बनसकता; क्योंकि
पटादि अवयवी बनाभी रहे परन्तु उसमेंसे यदि तीन चार ( परमाणु ) हिस्से अर्थात्
तन्तु आदि निकाल लिये जाँय अथवा और डालदिये जाँय तो 'यह वही पट है'
इत्यादि प्रत्यभिज्ञाज्ञान उसमें होनेसेभी उसका परिमाणान्तर होजाताहै; यह वार्ता तो
प्रत्यक्ष अनुभवसिद्ध है अर्थात् ऐसे स्थलमें अवयविनाशरूप कारणके न होनेपरभी
परिमाणनाशरूप कार्य देखनेमें आया; इसलिये व्यतिरेकव्यभिचार हुआ.
परमाणुविश्लेषे द्वयणुकस्य नाशोऽवश्यमभ्युपेयस्तन्नाशे च
त्र्यणुकनाश इत्येवं क्रमेण महावयविनो नाशस्यावश्यकत्वात् ।
सति च नाशके ऽनभ्युपगममात्रेण नाशस्यापवदितुमशक्य-
त्वात् । शरीरादाववयवोपचये ऽसमवायिकारणनाशस्यावश्य-
कत्वादवयविनाश आवश्यकः ।
समाधान-परमाणुद्वयके विश्लेषसे द्वयणुकका विनाश तो आपको स्वीकृतही
होगा. एवं द्वयणुकके नाश होनेसे त्रसरेणुका नाशभी माननेही योग्य है; इसी क्रमसे
महाअवयवीपर्यन्त विनाशका विचार अवश्य करना उचित है. इस क्रमसे यदि परि-
माणका विनाशक अवयवीनाशही बुद्धिमें आजाय तो केवल उसके ना स्वीकार
करणमात्रसे आप अवयवीनाशका अपलाप नहीं करसकते, असमवायिकारणके विना-
शसे कार्यका विनाश नियमसे होताहै. एवं शरीरादिकोंमेंभी ( अवयव ) अङ्गोंके
बढ़नेसे शरीरके असमवायिकारण अवयवसंयोगका विनाश अवश्य होताहै, इसलिये
अवयवी शरीरका विनाशभी अवश्य मानना चाहिये.