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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 350 में से

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पृष्ठ 262

२३८ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ गुण-
परमाण्वन्तरे पूर्वसंयोगनाशश्च ३। ततः परमाण्वन्तरसंयोगः ४।
ततो द्व्यणुकोत्पत्तिः ५। अथ रक्तोत्पत्तिः ६॥ इति षट्क्षणा ॥
भाषा-( तथाहि ) अग्निसंयोगज परमाणुकी क्रियासे परमाण्वन्तरका विभाग
होता है. उस विभागसे द्व्यणुकादि द्रव्यके आरम्भक संयोगका विनाश होता है.
उससे पीछे द्व्यणुकका विनाश तथा परमाण्वन्तरमें क्रिया होती है १ । उससे पीछे
दूसरे क्षणमें नष्ट द्रव्यके परमाणुओंमें श्यामादि गुणोंका विनाश तथा परमाणु
अन्तरमें होनेवाली क्रियासे उत्पन्न होनेवाला विभाग होता है २। उससे पीछे तीसरे
क्षणमें नष्ट द्रव्यके परमाणुओंमें रक्तादिरूपकी उत्पत्ति होती है तथा परमाणु
अन्तरमें पूर्वसंयोगका विनाश होता है ३ । उससे पीछे चौथे क्षणमें रक्तहुए
परमाणुका परमाणु अन्तरके साथ संयोग होता है ४। उससे पीछे पञ्चम क्षणमें
द्व्यणुकादि द्रव्यकी उत्पत्ति होती है ५। छठे क्षणमें सम्पन्न द्व्यणुकादि द्रव्यमें
रक्तादिरूपकी उत्पत्ति होती है ६ ॥ इति षट् क्षणप्रक्रिया ॥
अथ सप्तक्षणा-एवं श्यामनाशक्षणे परमाण्वन्तरे कर्मचिन्त-
नात्सप्तक्षणा ।
अथ सप्तक्षणा-एवं यदि श्यामादि गुणनाशक्षणमें पूर्वोक्त रीतिसे परमाण्वन्तर-
में कर्मका चिन्तन करें तो सप्तक्षणमें पुनः द्रव्य रूपादिगुणोंवाला होता है.
तथाहि । परमाणौ कर्म, ततः परमाण्वन्तरेण विभागः,तत आर-
म्भकसंयोगनाशः, ततो द्व्यणुकनाशः १। ततः श्यामादिनाशप-
रमाण्वन्तरकर्मणी २ । ततो रक्तोत्पत्तिः परमाण्वन्तरे कर्मजवि-
भागश्च ३। ततः परमाण्वन्तरेण पूर्वसंयोगनाशः ४ । ततः पर-
माण्वन्तरेण संयोगः ५ । ततो द्व्यणुकोत्पत्तिः ६ । ततो रक्तो-
त्पत्तिः ७ ॥ इति सप्तक्षणा ॥
भाषा-( तथाहि ) अग्निसंयोगसे परमाणुमें क्रिया होती है; उस क्रियासे एक
परमाणुका दूसरेसे विभाग होता है; उस विभागसे द्रव्यारम्भक संयोगका विनाश
होता है. १। उससे पीछे द्व्यणुकादि द्रव्यका विनाश होताहै १ । उससे पीछे
दूसरे क्षणमें नष्टद्रव्यके परमाणुओंमें श्यामादिगुणोंका विनाश तथा परमा-
ण्वन्तरमें क्रिया होती है २ । उससे पीछे तीसरे क्षणमें नष्ट द्रव्यके
परमाणुओंमें रक्तादि गुणोंकी उत्पत्ति तथा परमाणुअन्तरमें क्रियाजन्य विभाग
होताहै ३ । उससे पीछे चौथे क्षणमें परमाणुअन्तरके साथ पूर्व संयोगका नाश