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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 259, कुल 350 में से

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पृष्ठ 259

परिच्छेदः ५ ] भाषाटीकासमेता. २३५
भाषा-( तथा हि ) प्रथम अग्निसंयोगसे द्वयणुककारम्भक परमाणुमें क्रिया होतीहै;
उस क्रियासे पीछे परमाणुद्वयका विभाग होताहै. उस विभागसे पीछे द्वयणुकादि
द्रव्यके आरम्भक संयोगका नाश होताहै उसके पीछे द्वयणूकरूप द्रव्यका नाश तथा
परमाणु आकाशका विभाग ये दोनों एकही क्षणमें होतेहैं १ । उससे पीछे द्वितीय
क्षणमें परमाणुगत श्यामादिरूपका नाश तथा परमाणु आकाशके प्रथम संयोगका नाश
ये दोनों एकही क्षणमें होतेहैं २। उससे पीछे तृतीयक्षणमें परमाणुगत रक्तादिकी उत्प-
त्ति तथा परमाणुआकाशका उत्तरसंयोग ये दोनों एकही क्षणमें होतेहैं ३ । उससे
पीछे चतुर्थक्षणमें अग्निनोदनसे उत्पन्न हुई परमाणुगत क्रियाका नाश होता है ४ ।
उससे पीछे पंचमक्षणमें अदृष्टवाले आत्माके संयोगसे अर्थात् वह परिपक्क द्रव्य जिस
जीवात्माके भोगार्थ बनाहै उसके सम्बन्धसे द्रव्यारम्भणानुकूल क्रिया होतीहै ५ ।
उससे पीछे छठे क्षणमें उस क्रियासे परमाण्वाकाशादिका विभाग होताहै ६ । उस
विभागसे पीछे सातवें क्षणमें विभक्त अवयवोंके पूर्वसंयोगका नाश होताहै ७। उससे
पीछे अष्टमक्षणमें द्रव्यारम्भक संयोग होताहै ९। उससे पीछे नवम क्षणमें द्वयणुका-
दि द्रव्यकी उत्पत्ति होतीहै ९ । उससे पीछे दशमक्षणमें रक्तादि गुणोंकी उत्पत्ति
होतीहै १० । इति ।
अथैकादशक्षणा-वह्निसंयोगात्परमाणौ कर्म । ततो विभागः,
ततो द्रव्यारम्भकसंयोगनाशः, ततो द्वयणुकनाशः १। ततो
द्वयणुकनाशविशिष्टं कालमपेक्ष्य विभागजविभागश्यामानाशौ२।
ततः पूर्वसंयोगनाशरक्तोत्पत्ती ३ । तत उत्तरसंयोगः ४।
ततो वह्निनोदनजन्यपरमाणुकर्मनाशः ५ । ततोऽदृष्टवदात्मसं-
योगाद्द्रव्यारम्भानुगुणक्रिया ६ । ततो विभागः ७ । ततः
पूर्वसंयोगनाशः ८। ततो द्रव्यारम्भकसंयोगः ९ । ततो द्वयणु-
कोत्पत्तिः १० । ततो रक्ताद्युत्पत्तिः ११ । इति ॥
अथ एकादशक्षणाप्रक्रिया-अग्निसंयोगसे परमाणुओंमें क्रिया होतीहै, उस
क्रियासे एक परमाणुका दूसरेसे विभाग होताहै. उस विभागसे द्रव्यके आरम्भकसंयो-
गका नाश होताहै उससे पीछे द्वयणूकरूप कार्यद्रव्यका विनाश होताहै १ । उससे
पीछे द्वयणूकरूप द्रव्यनाशाधिकरणकालकी अपेक्षासे दूसरे क्षणमें परमाणुद्वयविभा-
गसे परमाण्वाकाशका विभाग तथा परमाणुगत श्यामादिरूपका नाश होताहै२। उससे
पीछे तीसरे क्षणमें प्रथम जहां परमाणुओंका संयोग था उसका नाश तथा रक्तादि