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न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 350 में से

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पृष्ठ 25

अथ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली
भाषाटीकासमेता ।
अथ प्रत्यक्षपरिच्छेदः १.
प्रज्वालितो ज्ञानतमोऽपनोदी येन प्रदीपो मधुरैर्वचोभिः ॥
सन्मानसे मानसराजहंसं वन्दे गुरुं नानकनामकं तम् ॥ १ ॥
मूढस्तु मूढ एवास्ति तत्त्वज्ञस्त्वस्ति तत्त्ववित् ॥
तस्मादूर्द्ध्वप्रबुद्धा ये ते सन्त्यत्राधिकारिणः ॥ २ ॥
चूडामणीकृतविधुर्वलयाकृतवासुकिः ।
भवो भवतु भव्याय लीलाताण्डवपण्डितः ॥ १ ॥
भाषा-चूडामणिरूप कियाहै चन्द्र जिनने, तथा कंकणरूप किया है वासुकि सर्प
जिनने ऐसे जो स्वाभाविक नृत्यमें निपुण महादेव हैं वे हम सबके कल्याणके लिये
होवें ॥ १ ॥
निजनिर्मितकारिकावलीमतिसंक्षिप्तचिरंतनोक्तिभिः ॥
विशदीकरवाणि कौतुकात्ननु राजीवदयावशंवदः ॥ २ ॥
भाषा-मैं अपने राजीव नामक शिष्य पर कृपा करता हुआ, प्राचीन आचार्योंके
अतिसंक्षिप्त सिद्धान्तानुकूल, अपनी बनाई कारिकावलीको अनायासही स्फुट
करता हूं ॥ २ ॥
सद्द्रव्यागुणगुम्फितासुकृतिनां सत्कर्मणां ज्ञापिका-
सत्तासामान्यविशेषनित्यमिलिताऽभावप्रकर्षोज्ज्वला ॥
विष्णोर्वक्षसि विश्वनाथकृतिना सिद्धान्तमुक्तावली
विन्यस्ता मनसो मुदं वितनुतां सद्युक्तिरेषा चिरम् ॥ ३ ॥
भाषा-पृथिवी जलादि नव द्रव्योंके सहित रूपरसादि चौवीस गुणोंसे
गुंथित, उत्क्षेपणादि पंचविध कर्मकी बोधक, जातिरूप सामान्य तथा विशेष और

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